लखनऊ/नोएडा, 22 अप्रैल (आरएनएस ) भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बुधवार को नोएडा में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सपा और कांग्रेस द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध तथा परिवारवाद के संरक्षण के मुद्दे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिलाएं संभालेंगी जिम्मेदारी, तो खत्म होगी पारिवारिक यारी। उन्होंने कहा कि नोएडा केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के सबसे तेज प्रगति करने वाले शहरों में शामिल है। इस औद्योगिक नगरी में हजारों कंपनियां और उद्योग संचालित हो रहे हैं और राज्य की तरक्की का रास्ता इस शहर से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा कि इस प्रगति में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी बराबर भागीदारी है।प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले के हालात से सभी परिचित हैं, जब शहरों में छेडख़ानी की घटनाएं आम थीं और परिवारों को अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता था, जबकि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अनेक प्रभावी कदम उठाए गए, जिससे महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।उन्होंने कहा कि वर्तमान में नोएडा की आईटी कंपनियों, स्टार्टअप और उद्योगों में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यरत हैं। डबल इंजन सरकार के प्रयासों से बीते नौ वर्षों में राज्य में कामकाजी महिलाओं की संख्या बढ़कर लगभग 36-37 प्रतिशत तक पहुंच गई है।पकज चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक लाकर यह सुनिश्चित किया है कि सामान्य परिवारों की महिलाएं भी विधायक और सांसद बन सकें। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प सशक्त नारी, समृद्ध समाज, महिला आरक्षण से नया आगाज है।विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां, जो परिवारवाद की राजनीति पर आधारित हैं, इस विधेयक का विरोध कर महिलाओं के सशक्तिकरण में बाधा डाल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों ने महिलाओं के जीवन में आने वाले ऐतिहासिक बदलाव का विरोध किया है और सामाजिक रूप से महिलाओं को मजबूत होने से रोकने का प्रयास किया है।तीन तलाक कानून का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी दल मुस्लिम महिलाओं के हितों के नाम पर राजनीति करते हैं, जबकि तीन तलाक कानून का विरोध कर उन्होंने अपनी वास्तविक मंशा उजागर की थी। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग संविधान की मूल भावना के विपरीत है और इससे समाज में विभाजन की मानसिकता को बढ़ावा मिलता है।
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