देहरादून,24 अपै्रल (आरएनएस)। जुमा की नमाज के मौके पर जामा मस्जिद पल्टन बाजार में शहर काजी मुफ्ती हशीम अहमद कासमी ने हज की अहमियत और उसके रूहानी पहलुओं पर प्रकाश डाला। कहा कि हज इस्लाम का एक बुनियादी स्तंभ है, जो इंसान की जिंदगी में गहरा बदलाव लाने का जरिया बनता है। उन्होंने कहा कि यह महज एक सफर नहीं, बल्कि इंसान के दिल और सोच की इस्लाह का मुकम्मल अमल है। उन्होंने कहा कि हज हमें यह सीख देता है कि असली इज्जत और बुलंदी न दौलत में है, न नस्ल और न ही ओहदे में, बल्कि अल्लाह के डर (तकवा) में है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए लाखों लोग जब एक ही लिबास (एहराम) में, एक ही जगह पर, एक ही रब की इबादत के लिए जमा होते हैं, तो यह इंसानी बराबरी और भाईचारे की बेहतरीन मिसाल पेश करता है। कहा कि हज का एक अहम मकसद इंसान के दिल में अल्लाह का खौफ और उसकी याद को जिंदा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि हज सब्र, कुर्बानी और इंसानियत का पैगाम देता है। यह हमें याद दिलाता है कि असली कामयाबी अल्लाह की रजा में है और एक अच्छा इंसान वही है जो दूसरों के साथ मोहब्बत, बराबरी और हमदर्दी का व्यवहार करे।
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