भोपाल 28 अप्रैल (आरएनएस)।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप मध्यप्रदेश ‘आत्मनिर्भर भारतÓ के विजन को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विभाग ने पिछले तीन वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा है कि ‘वोकल फॉर लोकलÓ के संकल्प के साथ विभाग ने पारंपरिक कारीगरों और शिल्पियों को सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के सपनों को जमीन पर उतारा है।
राज्यमंत्री जायसवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संकल्प है कि प्रदेश के हर गांव के हुनर को बाजार मिले और हर हाथ को काम मिले। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि पारंपरिक शिल्प को आधुनिक नवाचार के साथ संरक्षित किया जाए और ‘मृगनयनीÓ व ओडीओपी उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने कुम्हार, बुनकर, बांस शिल्पी, रेशम उत्पादक और महिला स्व-सहायता समूहों को प्राथमिकता पर ऋण, प्रशिक्षण व मार्केटिंग सहायता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि देवास धागा प्लांट जैसी ग्रामीण औद्योगिक इकाइयों को समय-सीमा में पूरा कर युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
1800 करोड़ का रिकार्ड कारोबार-मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशों के पालन में विभाग ने रिकॉर्ड रोजगार सृजन किया है। पिछले 3 वर्षों में 2.5 लाख से अधिक हितग्राहियों को स्वरोजगार के लिए ऋण और अनुदान सहायता प्रदान की गई है। एमपी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम के माध्यम से 1800 करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड कारोबार किया गया है। चंदेरी, महेश्वरी, बाग प्रिंट और गोंड पेंटिंग जैसे पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
एक जिला-एक उत्पाद योजना के उत्कृष्ट कार्यान्वयन के लिए मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर मेडल (2024) से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान मुख्यमंत्री के ‘हर जिले की अपनी पहचानÓ के विजन का परिणाम है। माटी कला और बांस शिल्प को संजीवनी देते हुए कुम्हारों और बांस शिल्पियों को आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराकर 35 हजार से अधिक परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया गया है।
रेशम उत्पादन में नई ऊंचाइयां : नर्मदापुरम और नंदपुरम केंद्र बने मॉडल==
रेशम संचालनालय के माध्यम से प्रदेश में टसर एवं मलबरी रेशम उत्पादन को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर बैतूल, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, सिवनी एवं नर्मदापुरम जिलों में रेशम उत्पादन का क्षेत्र बढ़ाया गया है। नर्मदापुरम स्थित रेशम उत्पादन केंद्र में मलबरी रेशम कीट पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जहां किसानों को शहतूत पौधरोपण, उन्नत कीट पालन तकनीक और धागाकरण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं नंदपुरम, जिला मंडला स्थित रेशम कीट पालन एवं बीज उत्पादन केंद्र को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। यह केंद्र पूर्वी मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल के किसानों को उच्च गुणवत्ता के रोग मुक्त अंडे (डीएफएल) एवं तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है। नंदपुरम केंद्र से प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक डीएफएल का उत्पादन कर हितग्राहियों को वितरित किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में टसर कोसा उत्पादन में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।
पिछले दो वर्षों में 8,500 से अधिक किसानों को रेशम कीट पालन से जोड़ा गया है। हितग्राहियों को कीट पालन उपकरण, प्रशिक्षण एवं 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। रीवा एवं उज्जैन में स्थापित शासकीय रेशम केंद्रों से धागाकरण एवं बुनाई इकाइयों को कच्चा माल उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे 12 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। ‘सिल्क मार्कÓ प्रमाणन के साथ मध्यप्रदेश के रेशम उत्पादों को ‘मृगनयनीÓ के माध्यम से राष्ट्रीय बाजार में बेचा जा रहा है।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में विभाग ने स्व-सहायता समूहों के माध्यम से लगभग 1.2 लाख महिलाओं को अगरबत्ती, मसाले, अचार, दोना-पत्तल, सिलाई-कढ़ाई और रेशम धागाकरण जैसे कार्यों से जोड़ा है। डिजिटल मार्केटिंग को बढ़ावा देते हुए ‘मृगनयनीÓ और ओडीओपी उत्पादों को अमेजन, फ्लिपकार्ट और जेम पोर्टल से जोड़कर स्थानीय कारीगरों को पूरे देश का बाजार उपलब्ध कराया गया है। देवास में नया धागा प्लांट लगाने जैसी योजनाएं ग्रामीण औद्योगिकीकरण को बढ़ावा दे रही हैं।
भविष्य की दिशा-राज्यमंत्री जायसवाल ने बताया कि अब ग्रामोद्योग उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को और मजबूत किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप हर गांव के हुनर और हर हाथ को काम मिले। ‘आत्मनिर्भर मध्यप्रदेशÓ के निर्माण में कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग की भूमिका निर्णायक सिद्ध हो रही है।

