नकुल कुमार मंडल
कोलकाता 30 अप्रैल (आरएनएस)। भले ही पश्चिम बंगाल में अबतक सत्तारुढ़ तृणमूल चुनाव आयोग को लेकर जो भी आरोप लगाए लेकिन इस विधानसभा चुनाव में मतदान को लेकर की गई हिंसा में किसी की जान नहीं गई है। इसे लोग चुनाव आयोग की सफलता करार दे रहें हैं। कई दशक बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब चुनाव के दौरान कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई है। सुरक्षा बलों की तैनाती और अफसरों के तबादले को लेकर चुनाव आयोग को कितना भी घेरने की कोशिश क्यों न हुई हो, लेकिन देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साबित कर दिया है कि बंगाल में भी ये सब संभव है। जैसे राजनीति के तमाम जानकार और चुनाव विश्लेषकों के लिए यह चौंकाने वाला अनुभव रहा है, हैरान तो ममता बनर्जी भी हो रही होंगी। जिस बंगाल में चुनावी हिंसा को लाइलाज बीमारी माना जाने लगा, वहां हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई. चुनाव आयोग के एहतियाती उपाय बेहद कारगर साबित हुए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल की सराहना करते हुए कहा कि यहां आजादी के बाद सबसे ज्यादा मतदान हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य में पहले चरण में 93.18त्न और दूसरे चरण में 91त्न वोटिंग दर्ज की गई, जो अब तक का रिकॉर्ड है। ज्ञानेश कुमार ने कहा, “आजादी के बाद पश्चिम बंगाल में पहले और दूसरे दोनों चरणों में सबसे अधिक मतदान हुआ है। यह चुनाव का त्योहार है और पश्चिम बंगाल का गर्व भी।”ज्ञानेश कुमार ने आगे कहा कि, ये शानदार आंकड़े दोनों चरणों में मतदाताओं की जबरदस्त भागीदारी को दिखाते हैं।
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