सोहावल-अयोध्या 1 मई (आरएनएस )। वृहस्पतिवार को रौनाही में आयोजित की गई जुबेर खान एवं सुल्तान खान मेमोरियल प्रांतीय गुड़दौड़ प्रतियोगिता सवालों के घेरे में आ गई हैं। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों में शामिल फाइनल राउंड का बहिष्कार कर 3 प्रतिभागी घुड़सवारों ने प्रतियोगिता को नियम विरुद्ध और अनुचित फैसला वाला बताया है। प्रतियोगिता के दौरान आयोजकों के प्रबंधन को इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।
आरोप है कि पिछली दो प्रतियोगिताओं से लगातार बाजी मारते आए पटना के घोड़े बाबर मालिक रुदल यादव सवार सलीम की फाइनल राउंड में दौड़े आठ घुड़सवारों में हैट्रिक लग रही थी। घोड़ा तीसरी बार विजेता बन चुका था लेकिन आयोजक मंडल और रेफरी के द्वारा सभी घोड़ों को फाउल करार देकर राउंड निरस्त कर दिया गया।आठ में से तीन प्रतिभागियों ने अपने घोड़े फाइनल राउंड से हटा लिए और प्रतियोगिता को अन्याय पूर्ण बताया। अंतिम फाइनल राउंड से हटने वाले दो अन्य घुड़सवारों में सैयद फरहान अहमद मोतीहारी बिहार व सभासद अनवर लखनऊ के घोड़े रहे। दौडऩे वाले अन्य पांच घोड़े में पटना बिट्टू यादव का घोड़ा राजधानी एक्सप्रेस प्रिंस यादव का घोड़ा रघुनाथ बेगूसराय रूबी नायक कुशीनगर के दो घोड़े शेरू शामिल रहे। आयोजक मंडल के अनुसार राजधानी एक्सप्रेस ने बाजी मारी और पहला पुरस्कार जीता। प्रतियोगिता से बाहर जाने वाले घोड़े के मालिक ने आरोप लगाया कि घोड़े अगर फाउल थे। तब वीडियो रिकार्डिंग से देखकर उन्हें अलग किया जा सकता था। लेकिन फाइनल राउंड चार राउंड से कम नहीं होता। आयोजकों ने फाइनल राउंड 2 राउंड का कर के प्रतियोगिता के नियमों की अवहेलना कर मनमानी दौड़ कराया। फाइनल राउंड दौड़ के दौरान मौजूद हजारों दर्शकों का सब्र बांध टूट गया और वह दौड़ की लाइन में भागते नजर आये। प्रबंधतंत्र की व्यवस्था फेल हो गई। जिससे घोड़े भी बिदक गए और फैसला संदेह के घेरे में आ गया था। आयोजकों की चिंता इतनी बढ़ गई कि प्रतियोगिता समाप्त होते ही वह मीडिया से बचने के लिए अपने घरों के लिए वापस लौट गये।
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