अस्पताल में डॉक्टर ने नौकरी देने के बहाने किया यौन उत्पीडऩ, मुकदमा वापस लेने का दबाव
प्रयागराज। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में स्थित एक निजी अस्पताल में काम कर चुकी 29 वर्षीय नर्स ने अस्पताल के डॉक्टर श पर यौन उत्पीडऩ और छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। पीडि़ता ने डॉक्टर मनीष केसरी और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस की धारा 127 (2) और 76 के तहत सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।
पीडि़ता ने बताया कि नौकरी दिलाने के बहाने आरोपी डॉक्टर ने उससे छेड़छाड़ और जबरदस्ती की कोशिश की। 20 मार्च को डॉक्टर मनीष केशरी ने पीडि़ता को अस्पताल से बुलाकर अपनी कार में बैठाया और संगम क्षेत्र ले जाकर अश्लील हरकतें करने की कोशिश की। जब पीडि़ता ने विरोध किया और रोने लगी, तो आरोपी ने उसे अस्पताल के बाहर छोड़ दिया और गलती मानते हुए वादा किया कि ऐसा दोबारा नहीं होगा।
आरोप है कि 26 मार्च को अस्पताल के ही ऑपरेशन थिएटर के अंदर डॉक्टर ने नशे में धुत एक अन्य व्यक्ति को साथ लेकर फिर पीडि़ता से छेड़छाड़ की। पीडि़ता ने बताया कि डॉक्टर ने नौकरी जारी रखने के लिए उसे खुश करने का लगातार दबाव बनाया। 29 मार्च को पीडि़ता ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। उसने इस मामले की शिकायत अस्पताल के दो निदेशकों से भी की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर 17 अप्रैल को थाने पहुंचकर एफआईआर दर्ज कराई।
इस घटना से पीडि़ता बेहद डरी हुई है। उसके पास अब कोई नौकरी नहीं है, जिससे आर्थिक परेशानियां बढ़ गई हैं। पीडि़ता के पिता ने आरोप लगाया है कि आरोपी डॉक्टर उसे मुकदमा वापस लेने के लिए लगातार धमकियां दे रहा है। पीडि़ता ने शासन-प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी न्याय की अपील की है।
उधर अस्पताल प्रशासन ने आरोपी डॉक्टर को 18 अप्रैल को ही अस्पताल से निकाल दिया है। सिविल लाइंस थाना प्रभारी ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पीडि़ता के बयान दर्ज कर सबूत जुटाए जा रहे हैं।
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