रिंगनी रेलवे फाटक पर फिल्मी स्टाइल में सुपरवाइजर का अपहरण, (बलौदा बाजार)12 घंटे में पुलिस का पलटवार—एमपी से चार आरोपी दबोचे, युवक सकुशल बरामद। 1 मई 2026 की शाम 5 बजकर 52 मिनट पर थाना हथबंद क्षेत्र के रिंगनी रेलवे फाटक के पास आर.एस. इंफ्रा कंपनी के सुपरवाइजर शैनू शेख को स्कॉर्पियो ष्टत्र16 ष्ट 2066 में सवार बदमाशों ने घेरकर पहले बेरहमी से हाथ-मुक्कों से पीटा, फिर जबरदस्ती गाड़ी में ठूंसकर फरार हो गए, घटना इतनी अचानक थी कि मौके पर मौजूद लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही गाड़ी हवा हो चुकी थी, प्रार्थी चीनू शेख ने तुरंत थाना हथबंद पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 91/2026 धारा 140, 115(2), 142, 3(5) क्चहृस् के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की, मामला गंभीर था—एक तरफ अपहरण, दूसरी तरफ पीडि़त की जान का खतरा, ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर थाना हथबंद और साइबर सेल की संयुक्त टीम तत्काल एक्टिव हुई, रात में ही संभावित भागने के रास्तों पर नाकेबंदी की गई, पुलिस ने टेक्निकल मोड में जाते हुए स्कॉर्पियो के नंबर प्लेट, टोल नाका और रास्ते में लगे ष्टष्टञ्जङ्क फुटेज खंगाले, हर मूवमेंट को ट्रैक किया गया और फिर शुरू हुआ हाई-वोल्टेज पीछा, पुलिस टीम लगातार आरोपियों के पीछे लगी रही और आखिरकार करंजिया जिला डिंडोरी (मध्यप्रदेश) में चारों आरोपियों को वाहन सहित घेरकर हिरासत में ले लिया गया, अपहृत युवक शैनू शेख को भी उनके चंगुल से सकुशल छुड़ा लिया गया, पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह पूरा किडनैपिंग प्लान पुरानी रंजिश और विवाद के चलते रचा गया था, आरोपियों ने पहले से योजना बनाकर हमला किया और अपहरण को अंजाम दिया, गिरफ्तार आरोपियों में ओम नारायण पांडेय उम्र 33 वर्ष निवासी एचपी गैस एजेंसी रोड करंजिया जिला डिंडोरी, अजय यादव उम्र 38 वर्ष निवासी गुमाधारी थाना अमरकंटक जिला अनूपपुर, अभिषेक श्याम उम्र 23 वर्ष निवासी वार्ड 08 केराटोला करंजिया जिला डिंडोरी और योगीराज परस्ते उर्फ राहुल उम्र 26 वर्ष निवासी वार्ड 08 केराटोला करंजिया जिला डिंडोरी शामिल हैं, पुलिस ने चारों को 2 मई 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, इस पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ी बात यह रही कि पुलिस ने घटना के तुरंत बाद एक-एक मिनट की कीमत समझते हुए तेजी से काम किया और 12 घंटे के भीतर अपहरण जैसे गंभीर अपराध को सुलझाकर युवक की जान बचा ली, फिलहाल यह मामला साफ संदेश देता है कि अपराध चाहे कितनी भी फिल्मी स्टाइल में क्यों न हो—पुलिस की पकड़ से बच पाना अब आसान नहीं है।
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