हरिद्वार,03 मई (आरएनएस)। उत्तराखंड संस्कृत विवि के योग विज्ञान विभाग में आयोजित सात दिवसीय पंचकर्म एवं वैकल्पिक चिकित्सा कार्यशाला के छठे दिन रविवार को विद्यार्थियों को साउंड हीलिंग, नाद एवं नाड़ी चिकित्सा का प्रशिक्षण दिया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीनारायण जोशी ने विषय पर सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी दी। प्रो. जोशी ने भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की प्राचीनता और वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शरीर में 72 हजार नाडिय़ां होती हैं, जिनमें अवरोध आने पर विभिन्न रोग उत्पन्न होते हैं। उन्होंने नाड़ी चिकित्सा के तीन प्रमुख सिद्धांत रक्त आपूर्ति, नर्व सप्लाई और प्राण ऊर्जा को विस्तार से समझाया। साथ ही साउंड हीलिंग और नाद चिकित्सा के महत्व पर भी जानकारी दी। विद्यार्थियों को ध्वनि तरंगों के प्रयोग से मानसिक तनाव कम करने और शरीर को संतुलित करने की तकनीकें भी सिखाई गईं। इस दौरान छात्र-छात्राएं व अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
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