मेरठ 6 मई (आरएनएस)। मेरठ जिले में अवैध हथियार बनाने के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इंचौली थाना पुलिस और स्वाट टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए खरदौनी गांव के जंगल में चल रही अवैध तमंचा फैक्टरी पकड़ ली। पुलिस ने मौके से फैक्टरी के मास्टरमाइंड इमरान समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह में एक बीसीए का छात्र भी शामिल था, जो मांग के अनुसार हथियारों की सप्लाई करता था।
25 साल पहले भी चला चुका था हथियार फैक्टरी
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी इमरान पुराना और शातिर अपराधी है। करीब 25 वर्ष पहले वर्ष 2000 में भी वह अवैध हथियार फैक्टरी चलाने के आरोप में जेल जा चुका है। जेल से बाहर आने के लंबे समय बाद उसने दोबारा अपना नेटवर्क तैयार किया और जंगल के बीच गुप्त तरीके से हथियार बनाने का काम शुरू कर दिया। पुलिस का कहना है कि गिरोह काफी समय से सक्रिय था और आसपास के राज्यों तक हथियार पहुंचा रहा था। जंगल में बने मकान में अलमारी के नीचे बने तहखाने में ये अवैध हथियार फैक्टरी चलाई जा रही थी।
बीसीए छात्र भी निकला हथियार तस्करी में शामिल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि इस गिरोह में शामिल 19 वर्षीय उमंग ठाकुर शहर के एक महाविद्यालय में बीसीए की पढ़ाई कर रहा है। पढ़ाई के साथ-साथ वह अवैध हथियारों की मांग मिलने पर उनकी आपूर्ति करता था। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि उसने कुछ हथियार अपनी मौसी के घर पर छिपाकर रखे थे। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस उन हथियारों को बरामद करने की कोशिश कर रही है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अवैध हथियार बनाने का भारी मात्रा में सामान बरामद किया है। बरामद सामान में एक अधबना तमंचा और दो तैयार तमंचे मिले हैं। इसके अलावा 36 स्प्रिंग, 45 नाल और बारह बोर की नाल के कई टुकड़े भी बरामद हुए हैं। पुलिस को 115 स्प्रिंग केस भी मिले हैं। हथियार बनाने के लिए बाई, रिंच, पेचकस, प्लास, बेंच वाइस और छैनी जैसे उपकरण भी बरामद किए गए हैं। इसके अलावा 41 ड्रिल बिट, ग्राइंडर, वेल्डिंग रॉड, आरी और रेती भी मिली है। पुलिस ने एक वेल्डिंग मशीन और दो प्रकार की खराद मशीन भी जब्त की है।
चार हजार में बनता, छह हजार में बिकता था तमंचा
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में इमरान हथियार बनाने का काम करता था। दौराला निवासी कुलदीप मुख्य आपूर्तिकर्ता था, जबकि नरेंद्र बीच की कड़ी के रूप में काम करता था। पुलिस के अनुसार आरोपी करीब चार हजार रुपये में तमंचा तैयार करते थे और फिर उसे छह हजार रुपये तक में बेच देते थे। यह गिरोह पंजाब, हरियाणा और आसपास के जिलों में अवैध हथियारों की तस्करी करता था।
पुलिस अधीक्षक देहात अभिजीत कुमार ने बताया कि आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। साथ ही इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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