देहरादून,07 मई (आरएनएस)। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के एक दिवसीय श्रमिक कन्वेंशन में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका गया। सीटू ने श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह करने की पुरजोर मांग उठाई। प्रेस क्लब में आयोजित कन्वेंशन में मुख्य वक्ता के रूप में सीटू के राष्ट्रीय महामंत्री व पूर्व सांसद अलाराम करीम ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने आपदा को अवसर में बदलते हुए महामारी के दौरान मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताएं पास कराईं। उन्होंने कहा कि केरल में न्यूनतम वेतन पूरे भारत में सबसे अधिक है और उत्तराखंड में भी इसे लागू कराने के लिए श्रमिकों को संगठित होना होगा। करीम ने मांग की कि श्रमिकों का न्यूनतम वेतन ?26,000 घोषित किया जाए। आरोप लगाया कि 20 नवंबर 2025 को श्रम संहिताएं लागू करने की घोषणा के बाद से श्रमिकों में भारी आक्रोश है, जिसकी झलक 12 फरवरी 2026 की राष्ट्रीय हड़ताल में देखने को मिली। उन्होंने रुद्रपुर की ‘वी गार्ड’ कंपनी में महिला श्रमिकों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की और कहा कि यूनियन बनाना हमारा संवैधानिक अधिकार है। कन्वेंशन में सीटू के प्रांतीय अध्यक्ष महेन्द्र जखमोला, महामंत्री राजेंद्र सिंह नेगी, और प्रांतीय सचिव लेखराज ने भी विचार रखे। इस मौके पर राष्ट्रीय सचिव कामरेड के.एन. उमेश, प्रांतीय सचिव लेखराज, जिला सचिव अभिषेक भंडारी, भगवंत पयाल, दीपक शर्मा, कृष्ण गुनियाल, भोजन माता यूनियन से मोनिका, सुनीता, बबीता और आशा यूनियन से सुनीता चौहान, लोकेश देवी, रजनी यादव, मीना वर्मा आदि मौजूद रहे।
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