नई दिल्ली ,12 मई (आरएनएस)। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी चंद्रनाथ रथ की कथित हत्या मामले में प्राथमिकी दर्ज कर राज्य पुलिस से जांच अपने हाथ में ले ली है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने जांच का जिम्मा संभाला है.
अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने दिल्ली के विशेष अपराध विभाग के एक डीआईजी के नेतृत्व में सात सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है, जिसमें एजेंसी की विभिन्न इकाइयों के कुछ बेहतरीन जांचकर्ता शामिल हैं. यह दल कोलकाता के संयुक्त निदेशक को जानकारी देगा.
उन्होंने बताया कि सीबीआई के कोलकाता जोन के अधिकारी भी जांच के लिए इस दल में शामिल होंगे. अधिकारियों के अनुसार, सीबीआई की टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी है और उसने जांच शुरू कर दी है.
प्रक्रिया के अनुसार सीबीआई राज्य पुलिस की प्राथमिकी को अपने मामले के रूप में पुन: दर्ज करती है, जो जांच का प्रारंभिक बिंदु बन जाता है फिर जांच स्वतंत्र रूप से की जाती है. इसके बाद सीबीआई सक्षम न्यायालय के समक्ष अंतिम रिपोर्ट दाखिल करती है, जो उसकी जांच के निष्कर्षों के आधार पर आरोपपत्र या मामले को बंद करने संबंधी याचिका हो सकती है.
पश्चिम बंगाल पुलिस ने रथ हत्याकांड के सिलसिले में सोमवार को उत्तर प्रदेश और बिहार से तीन लोगों को गिरफ्तार किया. यह गिरफ्तारी एक संदिग्ध द्वारा टोल प्लाजा पर किए गए यूपीआई लेनदेन से मिले सुरागों के आधार पर की गई.
तीनों आरोपियों को रविवार को हिरासत में लिया गया और हत्या मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने उन्हें अगली सुबह गिरफ्तार कर लिया.
तकनीकी निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और अन्य सूचनाओं के आधार पर एसआईटी के सदस्यों को उत्तर प्रदेश और बिहार भेजा गया था.
एक अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान यह बात सामने आई कि हमलावरों द्वारा इस्तेमाल की गई संदिग्ध कार हत्या से पहले बल्ली टोल प्लाजा से गुजरी थी. उन्होंने बताया कि कार में सवार एक व्यक्ति ने कथित तौर पर यूपीआई के माध्यम से टोल का भुगतान किया था.
उन्होंने बताया कि तीनों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत हत्या, अवैध हथियार रखने, आपराधिक साजिश रचने और सबूतों को दबाने का आरोप लगाया गया है.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, दो आरोपियों (मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य) को बिहार के बक्सर से हिरासत में लिया गया, जबकि तीसरे आरोपी राज सिंह को बलिया (उत्तर प्रदेश) से हिरासत में लिया गया. पूछताछ के बाद तीनों को आज सुबह गिरफ्तार कर लिया गया.
इससे पहले पुलिस ने विक्की मौर्य की पहचान गलती से विशाल श्रीवास्तव के रूप में की थी और यह भी दावा किया था कि तीनों को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था.
उन्होंने बताया कि हत्या की साजिश और उसे अंजाम देने में कम से कम आठ लोग शामिल थे.
उन्होंने कहा कि पुलिस का मानना है कि हमलावरों ने रथ को निशाना बनाने से पहले विस्तृत रेकी की थी.
शुभेंदु के कार्यकारी सहायक रथ की पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के दो दिन बाद, छह मई को मध्यमग्राम में हत्या कर दी गई थी.
राज सिंह के अधिवक्ता हरिवंश सिंह ने सीबीआई जांच के आदेश का स्वागत करते हुए राज को बेकसूर बताया.
उन्होंने कहा ”सीबीआई जब मामले की जांच करेगी तो उसकी टीम बलिया जरूर आयेगी. और तब वह सीसीटीवी फुटेज को देखेगी जिससे साबित हो जाएगा कि राज सिंह निर्दोष है और उसे गलत तरीके से फंसाया गया है.ÓÓ
अधिवक्ता सिंह ने राज की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस पर गिरफ्तारी के लिए कानूनी औपचारिकता का पालन न करने का आरोप भी लगाया है.
उन्होंने कहा कि गिरफ्तार करने के बाद राज को कोलकाता ले जाने के लिये पुलिस को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड हासिल करना चाहिए था लेकिन कोलकाता पुलिस ने ऐसा नहीं किया तथा राज को लेकर चली गई.
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