नई दिल्ली,12 मई (आरएनएस)। महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) से जुड़े मामले के संबंध में व्यापक उत्पीडऩ, धर्म का अपमान, बदनामी और सुनियोजित तरीके से धमकाने सहित कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं.
ताजा खुलासा एनसीडब्ल्यू को उसकी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की इस मामले पर सौंपी गई रिपोर्ट में हुआ है. महिला अधिकार संस्था ने पहले टीसीएस नासिक से जुड़ी कई महिला कर्मचारियों के गंभीर आरोपों के बाद मिली शिकायतों के मामले पर खुद से संज्ञान लिया था. चेयरपर्सन विजया रहाटकर के निर्देश पर एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई गई थी.
कमेटी ने पिछली बार नासिक का दौरा किया था, जहां उन्होंने पीडि़तों टीसीएस के यौन उत्पीडऩ की रोकथाम आंतकरिक कमेटी के सदस्यों, पुलिस अधिकारियों और दूसरे खास गवाहों से बातचीत की.
एनसीडब्ल्यू के मुताबिक कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर होने वाले उत्पीडऩ का जिक्र किया है. इसमें वर्कप्लेस के जहरीले माहौल का जिक्र किया गया है, जिसमें बड़े पैमाने पर यौन उत्पीडऩ और वर्कप्लेस पर अधिकार का गलत इस्तेमाल होता है.
एनसीडब्ल्यू ने पैनल की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा, आरोपियों ने टीसीएस नासिक पर पूरा कंट्रोल कर लिया था. वे जवान और कमजोर लड़कियों को टारगेट करते थे और उन्हें सेक्सुअली, इमोशनली और मेंटली हैरेस करते थे. शिकायत करने वालों का सच में आरोपियों ने सेक्सुअली हैरेसमेंट किया था, छेड़छाड़ की कोशिशें की थी.
पैनल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि शिकायत करने वाली और काम की जगह पर दूसरों को धार्मिक भेदभाव का सामना करना पड़ा. महिला अधिकार संस्था ने कहा, आरोपी हिंदू धर्म की कहानियों, मान्यताओं, परंपराओं और रीति-रिवाजों का अपमान करके और लड़कियों को यह कहकर धमकाता था कि इस्लाम हिंदू धर्म से कहीं बेहतर धर्म है. आरोपी हिंदू धर्म में आस्था को नीचा दिखाने और उसे छोटा दिखाने में शामिल थे और महिला कर्मचारियों पर बार-बार धर्म के खिलाफ कमेंट करके दबाव वाला माहौल बनाते थे.
कमेटी ने कहा कि यह वर्कप्लेस पर सेक्शुअल हैरेसमेंट का एक आम मामला था, जिसमें महिला कर्मचारियों को डराना-धमकाना, पीछा करना, और ऐसे कामों, कमेंट्स और व्यवहार के तरीकों से उन्हें नीचा दिखाना शामिल था. इससे महिला कर्मचारियों को बेइज्जती महसूस हुआ. उन्हें वर्कप्लेस पर लगातार मेंटल हैरेसमेंट का सामना करना पड़ा.
एनसीडब्ल्यू के अनुसार कई महिला कर्मचारी शिकायत दर्ज कराना चाहती थी लेकिन ऐसा करने से डरती थी. उन पर काफी सामाजिक दबाव था, अपने परिवारों को सामाजिक बदनामी का सामना करने का डर था और सबसे बढ़कर, शिकायत करने का कोई औपचारिक तरीका और भरोसेमंद माहौल पूरी तरह से नदारद था.
रिपोर्ट में लिखा था, नासिक में टीसीएस ऑफिस असल में आरोपी दानिश, तौसीफ और रजा मेमन के कंट्रोल में था. उन्हें अश्विनी चैनानी बचा रहे थे. किसी भी कर्मचारी में अपनी आवाज उठाने की हिम्मत नहीं थी, और जिन्होंने ऐसा किया, उन्हें ट्रांसफर और नौकरी से निकाले जाने जैसे प्रोफेशनल नतीजों का डर था. आरोपी अश्विनी चैनानी ने अपनी चुप्पी और असंवेदनशीलता से आरोपियों के कामों का समर्थन किया था.
कई पीडि़तों ने बताया कि युवा कर्मचारी (जेनरेशन जेड) इस तरह की धर्म-विरोधी बातों से खास तौर पर प्रभावित हो सकते हैं. सिक्योरिटी में कमियां यह देखा गया कि सीसीटीवी कैमरे तो लगे थे, लेकिन वे काम नहीं कर रहे थे.
इसके अलावा वर्कप्लेस पर महिलाओं के सेक्सुअल हैरेसमेंट (प्रिवेंशन, प्रोहिबिशन एंड रिड्रेसल) एक्ट, 2013 (पॉश एक्ट) के तहत इंटरनल कमेटी पुणे और नासिक के लिए एक कॉमन कमेटी है. यह एक्ट का सीधा उल्लंघन है. एक भी आईसी मेंबर ने यौन उत्पीडऩ की रोकथाम एक्ट कम्प्लायंस के लिए नासिक यूनिट का दौरा या इंस्पेक्शन नहीं किया था.
कमेटी ने नोट किया कि इस मामले में घटनाओं का रुख तय करने वाला सबसे जरूरी फैक्टर टीसीएस नासिक यूनिट में वर्कप्लेस हैरेसमेंट को रोकने और उसके समाधान के लिए एक असरदार सिस्टम की कमी मिली. पैनल ने पुलिस को विटनेस प्रोटेक्शन एक्ट 2017 का सहारा लेने और मौजूदा हालात में सभी शिकायत करने वालों और गवाहों (साथ काम करने वालों) की सुरक्षा करने के लिए गाइड किया. साथ ही पुलिस को उन्हें मीडिया की बेवजह दखलंदाजी से बचाने और उन्हें एंटी-सोशल एलिमेंट्स से पूरी सुरक्षा देने का भी निर्देश दिया.
आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 75, 78, 79 और 299 के तहत चार्ज लगाया जा सकता है. इसमें कहा गया है कि बीएनएस का सेक्शन 299 किसी भी वर्ग के नागरिकों के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से जानबूझकर और गलत इरादे से किए गए कामों को सजा देता है.
एनसीडब्ल्यू के अनुसार कमेटी की राय में आरोपी पर बीएनएस के सेक्शन 68(ए) के तहत भी चार्ज लगाया जा सकता है, क्योंकि पहली नजर में तथ्य किसी महिला को चाहे वह उसकी कस्टडी में हो, उसके चार्ज में हो, या संबंधित जगह पर मौजूद हो, उसके साथ सेक्स करने के लिए उकसाने या बहकाने के लिए अधिकार का गलत इस्तेमाल करने का इशारा करते हैं.
इसमें कहा गया है कि इस बात पर पूरी नजर रखी जानी चाहिए और देखा जाना चाहिए कि आरोपी शिकायत करने वाली महिला की रेगुलर काम करने की आजादी और इसके के खिलाफ कोई कोशिश न करे और उसमें दखल न दे. एनसीडब्ल्यू ने कहा कि उसने संबंधित अधिकारियों और टीसीएस के प्रबंधन को मामले में उचित कार्रवाई करने और कार्यस्थल पर महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और सुरक्षा के लिए वैधानिक सुरक्षा उपायों का सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने की सिफारिश की है.
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