प्रयागराज 14 मई (आरएनएस)। सरकारी गोशालाओं में संरक्षित मवेशियों के लिए चारे-पानी की बेहतर सुविधाओं के दावे किए जा रहे हैं। जबकि, हकीकत इससे इतर है। गोशालाओं में न साफ-सफाई बेहतर रहती है और न पशुओं को हरा चारा मिल पाता है। शासन के आदेश गोशालाओं की जांच करने आए प्रादेशिक को-आपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पीसीडीएफ) के एमडी वैभव श्रीवास्तव ने खुद इससे रूबरू हुए। निरीक्षण के दौरान उन्हें ढोल के अंदर पोल वाली स्थिति दिखी।
सुबह करीब 11 बजे प्रयागराज पहुंचे पीसीडीएफ के एमडी ने सबसे पहले फाफामऊ के गोहरी स्थित वृहद गो आश्रय स्थल पहुंचे। नगर निगम की गोशाला में चारे-पानी आदि व्यवस्थाएं देखीं। पशुओं की चरही में भूसे में हरा चारा इस तरह से मिला गया था, मानो सिर्फ छिड़काव किया गया हो।
दस्तावेज में हरे चारे का पर्याप्त भंडारण था, लेकिन गोदाम में उपलब्धता महज नाम मात्र की थी। साफ-सफाई व्यवस्था बेपटरी मिली। उन्होंने कर्मचारियों को फटकार लगाई। एमडी भगवतपुर की मंदरदेह माफी स्थित गोशाला पहुंचे तो यहां भी स्थिति बदतर दिखी। हरे चारे का संकट था। हर तरफ गोबर फैला नजर आया। इस पर वह नाराज हुए।
एमडी ने मंदर मोड़ स्थित पीसीडीएफ के प्लांट का भ्रमण किया। प्रतापगढ़ की गोशालाओं का भी उन्होंने जायजा लिया। वहां सफाई व्यवस्था सबसे अधिक खराब मिली। इसके बाद सर्किट हाउस में मंडल के चारों जनपदों के मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों की बैठक ली। कहा कि जिन गोशालाओं के पास जमीन हैं, वहां हरा चारा की बोआई जरूर कराएं। हरे चारे के साथ भूसे में पशुआहार भी दें। इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
पीसीडीएफ के एमडी ने हाजीगंज स्थित अस्थायी गोआश्रय स्थल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने गौवंश के रखरखाव, चारे की उपलब्धता और गर्मी से बचाव के प्रबंधों का बारीकी से जायजा लिया। मवेशियों को लू से बचाने के उपाय करने के निर्देश दिए। पशुपालन विभाग के अपर निदेशक अनिल कुमार, सीवीओ डा. शिवनाथ यादव आदि मौजूद रहे।
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