प्रयागराज 14 मई (आरएनएस)। शनिवार को श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम होने जा रहा है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए वट सावित्री व्रत रखेंगी, वहीं इसी दिन न्याय के देवता भगवान शनि की जयंती भी हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी।
पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी विनयानन्द गिरी जी महाराज ने बताया कि ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वट सावित्री व्रत किया जाता है। इस दिन महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष का पूजन कर यमराज से अपने पति के प्राणों की रक्षा करने वाली माता सावित्री का स्मरण करती हैं।
उन्होंने कहा कि बरगद के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। महिलाएं वृक्ष की परिक्रमा कर रक्षा सूत्र बांधती हैं और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
महामंडलेश्वर स्वामी विनयानन्द गिरी के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या तिथि को ही भगवान सूर्य और माता छाया के पुत्र शनि देव का जन्म हुआ था। इस वर्ष शनिवार के दिन अमावस्या होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है। शनिवार को अमावस्या होने से यह ‘शनैश्चरी अमावस्याÓ का दुर्लभ योग बना रही है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

