जेल अधीक्षक सहित मुख्य नियंत्रक को किया निलंबित
कोलकाता 15 मई (आरएनएस)। आज राज्य सचिवालय नवान्न में मीडिया कर्मियों से बातचीत में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति, सुधार गृहों में चल रही अवैध गतिविधियों तथा आरजी कर घटना की जांच को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी को साझा किया।
राज्य सरकार ने प्रेसीडेंसी सुधार गृह में कैदियों द्वारा स्मार्टफोन इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के बाद जेल अधीक्षक और मुख्य नियंत्रक को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन का एक वर्ग अपराधियों के साथ सांठगांठ कर कैदियों को जेल के भीतर मोबाइल फोन इस्तेमाल करने में मदद कर रहा था। उन्होंने बताया कि हालिया तलाशी अभियान के दौरान प्रेसिडेंसी जेल से 23 स्मार्टफोन बरामद किए गए हैं। सीएम ने आगे कहा कि, कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर “रक्षक ही भक्षक” जैसे हालात थे और प्रशासन के एक वर्ग की अपराधियों के साथ सांठगांठ विकसित हो गई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार इस दुष्चक्र को तोडऩे के लिए लगातार अभियान चलाती रहेगी। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अपराधी जेल के भीतर से अपना नेटवर्क चला रहे हैं। यह एक दिन में नहीं हुआ। वर्षों से निचले स्तर से लेकर ऊपरी स्तर तक एक गठजोड़ तैयार किया गया था। इसी के आधार पर संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि इस तरह की अनियमितताएं पिछली सरकार के कार्यकाल से जारी थीं और मामले की जानकारी सुधार सेवा महानिदेशक को दे दी गई है। उन्होंने राज्य के सभी सुधार गृहों के अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में अपराधियों की मदद बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दमदम सेंट्रल जेल और बहरमपुर जेल समेत अन्य सुधार गृहों से भी इसी तरह की शिकायतें मिली हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रेसिडेंसी करेक्शनल होम में बंदियों के परिजनों की ओर से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, यहां तक कि स्मार्टफोन के उपयोग की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। शिकायत मिलते ही डीजी करेक्शनल होम एन. रमेश बाबू को मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस के सहयोग से तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। वहीं मामले पर डीजी (कारा) एन. रमेश बाबू ने बताया कि कोलकाता पुलिस की सहायता से प्रेसिडेंसी जेल में अचानक छापेमारी अभियान चलाया गया। 10 विशेष टीमों का गठन कर लगभग 4 घंटे तक तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें विभिन्न गुप्त स्थानों से कुल 23 मोबाइल फोन बरामद किए गए। ये मोबाइल जेल के भीतर कैसे पहुंचे, कौन उनका उपयोग कर रहा था और किन लोगों से संपर्क बनाए रखा जा रहा था। इसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
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