लखनऊ 15 मई (आरएनएस ),हर वर्ष 16 मई को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय डेंगू दिवस की पूर्व संध्या पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से डेंगू से बचाव के लिए अभी से सतर्कता बरतने और मजबूत कदम उठाने की अपील की है। डॉक्टरों का कहना है कि मानसून से पहले मई और जून के महीनों में मच्छरों के प्रजनन को नियंत्रित करना डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी की रोकथाम के लिए सबसे प्रभावी रणनीति है। बढ़ते तापमान और बदलते जलवायु पैटर्न को देखते हुए इस वर्ष डेंगू का खतरा पहले की तुलना में अधिक गंभीर हो सकता है।महानगर स्थित नियो-चाइल्ड क्लीनिक के सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिशियन तथा इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) के वर्ष 2023 के स्टेट प्रेसिडेंट डॉ. संजय निरंजन ने कहा कि डेंगू को लेकर लोगों में अब भी कई भ्रांतियां हैं। उन्होंने बताया कि आमतौर पर यह गलतफहमी रहती है कि एक बार डेंगू होने के बाद व्यक्ति को दोबारा संक्रमण नहीं हो सकता, जबकि वास्तव में डेंगू चार अलग-अलग वायरस (सीरोटाइप) से फैलता है। किसी एक प्रकार के वायरस से संक्रमित होने पर केवल उसी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है, बाकी तीन प्रकार के वायरस का खतरा बना रहता है। ऐसे में कोई व्यक्ति अपने जीवन में चार बार तक डेंगू से संक्रमित हो सकता है।डॉ. संजय निरंजन ने कहा कि दूसरी बार डेंगू होने पर बीमारी अधिक गंभीर हो सकती है और अस्पताल में भर्ती होने की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों में डेंगू का जोखिम अधिक होता है, क्योंकि उनका प्रतिरक्षा तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता। वहीं मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग जैसी बीमारियों से पीडि़त वयस्कों में भी गंभीर स्थिति का खतरा अधिक रहता है।विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में डेंगू अब केवल मानसून तक सीमित बीमारी नहीं रह गई है। दक्षिण और पश्चिम भारत के कई क्षेत्रों में यह पूरे वर्ष फैलने वाली बीमारी बन चुकी है, जबकि पहले कम प्रभावित माने जाने वाले पर्वतीय और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में भी अब इसके मामले सामने आने लगे हैं। तेजी से शहरीकरण, बढ़ता तापमान, अनियोजित निर्माण कार्य और घरों में पानी संग्रह करने की प्रवृत्ति मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है।भारतीय मौसम विभाग द्वारा वर्ष 2026 में सामान्य से अधिक तापमान और अधिक हीटवेव वाले दिनों की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो जैसे जलवायु परिवर्तनकारी प्रभावों के कारण अत्यधिक गर्मी और मौसम में बदलाव डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर सकते हैं, जिससे बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है।डॉक्टरों ने कहा कि डेंगू के लक्षण मच्छर के काटने के चार से दस दिन बाद सामने आते हैं। इनमें तेज बुखार, गंभीर सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, उल्टी, जी मिचलाना और त्वचा पर चकत्ते शामिल हैं। हालांकि कई मामलों में लक्षण सामान्य दिखाई देते हैं, लेकिन बुखार कम होने के बाद पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, अत्यधिक कमजोरी और मल या उल्टी में खून जैसे लक्षण गंभीर खतरे का संकेत हो सकते हैं।विशेषज्ञों ने आगाह किया कि समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर डेंगू जानलेवा साबित हो सकता है। डेंगू शॉक सिंड्रोम, डेंगू हेमोरेजिक फीवर, शरीर में फ्लूड लीकेज और कई अंगों के फेल होने जैसी जटिलताएं गंभीर स्थिति पैदा कर सकती हैं।डॉ. संजय निरंजन ने लखनऊ में वर्ष 2016 में फैले डेंगू प्रकोप का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान कई स्कूली बच्चों की मौत हुई थी, जिसने इस बात की गंभीर आवश्यकता को उजागर किया कि हर वर्ष डेंगू के मौसम से पहले रोकथाम, जागरूकता और उपचार व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाया जाए।स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर, गमले और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करें, पूरी बांह के कपड़े पहनें और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं, ताकि डेंगू के बढ़ते खतरे को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
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