लखनऊ 15 मई (आरएनएस ), बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शुक्रवार को हिन्दी प्रकोष्ठ की ओर से राजभाषा कार्यान्वयन समिति की त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इस दौरान कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह तथा राजभाषा प्रकोष्ठ के सहायक निदेशक डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव भी मंच पर उपस्थित रहे। बैठक में विश्वविद्यालय में हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग और उसे प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों का प्रभावी माध्यम बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई।बैठक की शुरुआत में डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव ने उपस्थित सदस्यों को बैठक के उद्देश्य और रूपरेखा से अवगत कराया। इसके बाद कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि हिन्दी को बढ़ावा देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि यह सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर ऐसे ठोस प्रयास किए जाने चाहिए, जिनसे हिन्दी का प्रयोग व्यवहारिक और प्रभावी रूप में बढ़ सके।कुलपति ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय के कार्यालयों में टिप्पण लेखन, प्रारूप तैयार करने तथा पत्राचार जैसे प्रशासनिक कार्यों में हिन्दी भाषा का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विभिन्न कार्यक्रमों, बैठकों और आयोजनों की पुस्तिकाएं हिन्दी में भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि भाषा के प्रयोग को व्यापक बनाया जा सके।उन्होंने विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रश्नपत्रों को द्विभाषीय स्वरूप में तैयार करने का सुझाव भी दिया। साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षकों एवं कर्मचारियों के आवासों तथा अतिथि गृहों के नाम हिन्दी में रखे जाने और सभी को हिन्दी में हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित किए जाने पर भी बल दिया।प्रो. मित्तल ने विश्वविद्यालय में “हिन्दी अनुवाद एवं व्याख्या प्रकोष्ठ” तथा “हिन्दी प्रकाशन प्रकोष्ठ” स्थापित करने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे हिन्दी में शैक्षणिक सामग्री, अनुवाद और प्रकाशन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि हिन्दी दक्षता विकसित करने के लिए समय-समय पर 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा सकती हैं।इसके अतिरिक्त कुलपति ने प्रत्येक विभाग से “भाषा प्रतिनिधि” चुने जाने का सुझाव दिया, जो अपने विभागों में हिन्दी के प्रयोग को प्रोत्साहित करें। उन्होंने विभागों में “हिन्दी दीवार” बनाए जाने का भी प्रस्ताव रखा, जहां प्रतिदिन हिन्दी शब्दावली और उपयोगी जानकारी प्रदर्शित की जा सके।उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी प्रयासों के माध्यम से हिन्दी को व्यवहार, प्रशासन, शिक्षा और विश्वविद्यालय संस्कृति का सशक्त माध्यम बनाया जा सकता है।
बैठक में विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष तथा शिक्षकगण उपस्थित रहे और राजभाषा के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने सुझाव भी साझा किए।
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