निजी स्कूलों की मनमानी फीस और अवैध वसूली पर लगाई रोक की मांग
प्रयागराज। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रयाग महानगर के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर शिक्षा के बाजारीकरण और निजी विद्यालयों में मनमानी फीस व अवैध वसूली के विरोध में प्रदर्शन किया। मल्टी-स्कूल प्रतिनिधि तथा प्रदेश आह्वान पर जिले भर से बड़ी संख्या में छात्र और कार्यकर्ता मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा।
महानगर मंत्री प्रतीक मिश्रा सूरज ने कहा कि निजी स्कूलों द्वारा अत्यधिक प्रवेश शुल्क और पुस्तकों व ड्रेस के नाम पर अतिरिक्त वसूली से अभिभावक और विद्यार्थी परेशान हैं। उन्होंने बताया कि सरकार से मांगें रखी गई हैं जिनमें शिक्षा के बाजारीकरण पर पूर्ण रोक। प्रवेश शुल्क केवल एक बार लिया जाए; कई स्कूल एलकेजी स्तर पर 13,000 से अधिक वसूल रहे हैं यह राशि वापस दिलवाई जाए।
प्रशासन द्वारा फीस निर्धारण तथा फीस वृद्धि पर अंकुश के लिए कठोर नियम बनाए जाएं। सभी विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य की जाएँ; निजी प्रकाशनों से अतिरिक्त वसूली रोकी जाए।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21ए और शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत निजी स्कूलों में 25त्न सीटें वंचित और गरीब बच्चों के लिए आरक्षित हैं, परन्तु अधिकतर स्कूल इस प्रावधान को अनदेखा कर रहे हैं। संगठन ने इसकी जांच और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही सरकारी सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में कक्षा 6 से 8 तक के लिए नि:शुल्क शिक्षा के नाम पर हो रही अवैध वसूली की भी शिकायतें उठाई गईं और ऐसे संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई।
संगठन ने निष्पक्ष जांच और दोषी स्कूल प्रबंधन पर प्रभावी कदम उठाने की अपील की। जिला संयोजक यमुनापार प्रशांत सिंह ने कहा कि जब तक छात्रों और अभिभावकों को न्याय नहीं मिलेगा, यह संघर्ष चलता रहेगा। धरने में सौरभ, आंचल, अभिषेक, आयुष, अमन, शिवांग सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता मौजूद रहे। मीडिया संयोजक आयुष विश्वकर्मा ने प्रतिक्रिया में बताया कि ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय से मुख्यमंत्री को भेजा जा चुका है और आगे की कार्रवाई के लिये प्रतीक्षा की जा रही है।
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