लखनऊ 18 मई (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने विधान भवन स्थित कार्यालय कक्ष में विभागीय अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पशुपालन, दुग्ध विकास एवं पशु स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने पशु चिकित्सा के छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये किए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय पशु चिकित्सा शिक्षा को नई ऊर्जा देने वाला है। इससे छात्रों का उत्साहवर्धन होगा और पशु चिकित्सा सेवाओं के लिए दक्ष मानव संसाधन तैयार करने में सहायता मिलेगी।धर्मपाल सिंह ने प्रदेश के गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर गैस एवं बायोगैस संयंत्रों के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन और आय सृजन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गोबर गैस संयंत्रों के जरिए स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ वर्मी कम्पोस्ट निर्माण पर भी विशेष बल दिया जाए, ताकि गो-आश्रय स्थलों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित हों और जैविक खेती को प्रोत्साहन मिले। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गोसंरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। वर्तमान में प्रदेश में 131 गोबर गैस संयंत्र स्थापित हैं, जिनकी कुल क्षमता 5244.75 घन मीटर है। इनमें 66 संयंत्र क्रियाशील हैं, जबकि 28 संयंत्र स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।पशुधन मंत्री ने आगामी बरसात के मौसम को देखते हुए संचारी रोगों की रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुओं को विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जाए और किसी भी जनपद में टीकाकरण कार्य में शिथिलता न बरती जाए। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के पशुपालकों को जागरूक करते हुए समयबद्ध ढंग से टीकाकरण कार्य पूरा कराया जाए।उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान एवं नस्ल सुधार कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आय में वृद्धि के लिए उन्नत नस्लों के संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही संबंधित योजनाओं के लाभार्थियों का चयन जून माह तक अनिवार्य रूप से पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र पशुपालकों को समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके।मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए धर्मपाल सिंह ने कहा कि पशुपालकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। जहां कहीं भी मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के संचालन में तकनीकी अथवा व्यवस्थागत समस्याएं सामने आ रही हैं, उनका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि पशुपालकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें।दुग्ध विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने प्रदेश में दुग्ध समितियों के विस्तार पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिकाधिक दुग्ध उत्पादकों को समितियों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए और दुग्ध सहकारी व्यवस्था को मजबूत किया जाए। इसके साथ ही गोरखपुर, कन्नौज और कानपुर में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा संचालित किए जाने वाले दुग्ध संयंत्रों को शीघ्र प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन संयंत्रों के शुरू होने से प्रदेश में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ेगी, दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।बैठक में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने विभागीय प्रगति की जानकारी देते हुए गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और दुग्ध समितियों के गठन को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से संचालित किए जाएं तथा कार्य में लापरवाही या उदासीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।बैठक में विशेष सचिव पशुधन देवेन्द्र पाण्डेय, पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक वैभव श्रीवास्तव, दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के., विशेष सचिव राम सहाय यादव, निदेशक प्रशासन एवं विकास डॉ. मेमपाल सिंह, निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, अपर निदेशक डॉ. संगीता तिवारी, संयुक्त निदेशक डॉ. पी.के. सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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