सिर पर सिलेंडर रखकर किया विरोध
प्रयागराज 19 मई (आरएनएस ) नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और हालिया पेपर लीक के विरोध में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने मंगलवार को सड़कों पर उतरकर सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के खिलाफ तेज नारेबाजी की। छात्रों ने विश्वविद्यालय यूनियन गेट से मार्च निकालकर डीएम कार्यलय की ओर रुख किया और केंद्र सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों के हाथों में कई तख्तियां और पोस्टर थे। जिन पर नौकरी नहीं, पेपर लीक का जाल और धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो जैसे नारे लिखे हुए थे। प्रदर्शनकारी छात्रों और नेताओं ने आरोप लगाए कि पेपर लीक रैकेट में कई नाम राजनीतिक दलों, खासकर भाजपा से जुड़े हैं। एक प्रदर्शनकारी ने दिनेश बिवाल का नाम लेते हुए कहा कि कई संदिग्धों के संबंध सत्ताधारी दल से जुड़े पाए जा रहे हैं।
पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष आदिल हमजा ने कहा कि सालभर मेहनत करने वाले लाखों प्रतियोगी छात्रों का भविष्य कुछ पैसों में बेच दिया जा रहा है। उन्होंने कहा यदि कोई प्रतियोगी छात्र अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने के लिए त्याग करता है, तो अंत में पता चलता है कि उसका भविष्य 30-40 लाख रुपये में बिक गया। हालिया पेपर लीक ने होनहार छात्रों की मेहनत पर पानी फेर दिया है और दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। वहीं आज देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस के दाम अपने चरम पर हैं, जिससे आम जनता और छात्रों का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है।
छात्र नेता संदीप विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक मामले में जितने भी नाम सामने आ रहे हैं, वे कहीं न कहीं भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने दिनेश बिवाल का नाम लेते हुए कहा कि वह भाजपा के नेता रहे हैं और इस पूरे रैकेट में शामिल अधिकांश लोगों के संबंध सीधे तौर पर सत्ताधारी दल से हैं। डॉ. प्रदीप जोशी एबीवीपी के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं और संघ के लोगों ने उनकी पैरवी की थी। वे इससे पहले जहां भी रहे चाहे छत्तीसगढ़ पीसीएस हो या मध्य प्रदेश पीसीएस उनके कार्यकाल में हर जगह पेपर लीक के मामले सामने आए। इसके बावजूद सरकार इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।
छात्र नेता अनुराग चौरसिया ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के तेज व्यावसायीकरण की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इससे गरीब व मध्यमवर्गीय छात्रों के सपने कुचले जा रहे हैं। उन्होंने प्रवेश परीक्षाओं की बढ़ती फीस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि एक किसान या मजदूर का बच्चा इतनी राशि कहां से लाएगा। शीर्ष नेतृत्व की नीतियों को युवा-संवेदनहीन करार देते हुए अनुराग ने कहा कि स्पष्ट योजनाओं की कमी के चलते युवा बेरोजगारी व महंगी शिक्षा का शिकार हैं।
प्रदर्शनकारी चेतावनी देते हुए बोले कि अगर सरकार ने हृश्वश्वञ्ज पेपर लीक और महंगाई के मामलों में तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो छात्र आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। मौके पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहा और किसी प्रकार की हिंसा की रिपोर्ट नहीं मिली।
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