संबलपुर (ओडिशा),21 मई (आरएनएस)। ओडिशा के संबलपुर में महज 52 रुपये के गुटखा और सिगरेट की चोरी के मामले में कोर्ट ने 20 साल बाद अपना फैसला सुनाया. उक्त मामला संबलपुर के कुचिंदा उपजिला के बामरा ब्लॉक के गोविंदपुर थाना क्षेत्र का है. इस घटना में 5 आरोपी थे, जिनमें से शिकायतकर्ता और 2 आरोपियों की मौत हो चुकी है.
2006 के इस मामले में जिन लोगों को कोर्ट ने बरी किया है, उनमें हेमंत साहू (55), गणेश जयपुरिया (50) और उमेश बंकारा (51) शामिल हैं.
संबलपुर जिले के बामरा (पांद्रीपाथा) गांव के बस्ती स्टेशन स्थित स्वर्गीय प्रफुल्ला साहू की पान की दुकान से 10 अक्टूबर, 2006 को 52 रुपये मूल्य का गुटखा और सिगरेट चोरी हो गया था. उन्होंने इस संबंध में गोविंदपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के आधार पर तत्कालीन पुलिस ने मामला दर्ज किया. जांच के बाद, पुलिस ने नुनियामुंडा गांव से चोरी के आरोप में 4 लोगों को और केचुपानी गांव से चोरी का सामान खरीदने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया. बाद में, आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया और वे नियमित रूप से अदालत में पेश हो रहे थे. लेकिन एक समय के बाद इन लोगों ने यह सोचकर की मामला खत्म हो गया है, कोर्ट में पेश होना छोड़ दिया. इसी बीच, घटना में शामिल 2 आरोपियों और शिकायतकर्ता प्रफुल्ला साहू का निधन हो गया.
दूसरी तरफ कोर्ट ने कुछ दिन पूर्व ही अचानक आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया. इसी क्रम में 17 मई 2026 को गोविंदपुर पुलिस ने नियम के मुताबिक नुनियामुंडा गांव के गणेश जयपुरिया और उमेश उर्फ अमेश बंकारा को चोरी के आरोप में और केचुपानी गांव के हेमंत साहू को चोरी का सामान खरीदने के आरोप में गिरफ्तार कर कुचिंदा अदालत में पेश किया. लेकिन तीनों के खिलाफ पुलिस के द्वारा पुख्ता सबूत नहीं पेश किए जाने पर कोर्ट ने इन्हें 19 मई को बरी कर दिया.
कुचिंदा लॉयर्स एसोसिएशन के वकील मिन केतन मिश्रा की जानकारी के अनुसार, 1 अक्टूबर, 2006 को प्रफुल्ला कुमार साहू ने गोविंदपुर पुलिस स्टेशन में एक अज्ञात व्यक्ति के नाम से शिकायत दर्ज कराई कि उनकी दुकान चोरी हो गई है. इस घटना में, जांच कर रही पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया और अदालत में मुकदमा चलाया. इस मामले में, एसडीजेएम अदालत में जमानत याचिका खारिज होने के बाद, उन्हें जेल भेज दिया गया. कुछ दिन जेल में बिताने के बाद, उन्हें जमानत मिल गई. फिर, उन्होंने 2006 से 2026 तक मुकदमा लड़ा. 19 मई, 2026 को एसडीजेएम अदालत ने उन्हें बरी कर दिया.
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