कोलकाता,21 मई (आरएनएस)। कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को अगस्त 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक ट्रेनी डॉक्टर के रेप और मर्डर के मामले में सबूतों को कथित तौर पर नष्ट करने और परिवार के खास आरोपों की नए सिरे से जांच का आदेश दिया.
गुरुवार को जारी एक आदेश में, जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की बेंच ने निर्देश दिया कि सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर (ईस्टर्न ज़ोन) के नेतृत्व में तीन सदस्यों वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) यह जांच करेगी.
सीबीआई को उस घटना की फिर से जांच करने का काम सौंपा गया है, जो उस मनहूस रात को डॉक्टर के खाना खाने से लेकर अगली शाम उनके अंतिम संस्कार तक हुई.
सीबीआई को किसी से भी पूछताछ करने का अधिकार है, जिसे वह जरूरी समझे. साथ ही, एसआईटी पीडि़त परिवार के लगाए गए खास आरोपों की अच्छी तरह से जांच करेगी. कोर्ट ने एसआईटी को 25 जून को अगली सुनवाई में अपनी रिपोर्ट जमा करने को कहा है.
9 अगस्त, 2024 की रात को अस्पताल में युवा डॉक्टर के साथ रेप और मर्डर कर दिया गया, जिससे डॉक्टर्स कम्युनिटी और आम लोगों में पूरे देश में हंगामा मच गया.
आरोप लगे हैं कि सबूत नष्ट कर दिए गए और घटना के तुरंत बाद उसे कम दिखाने की कोशिश की गई. हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने कहा कि सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर, ईस्ट, टीम का नेतृत्व करेंगे. टीम के बाकी दो सदस्यों पर कोर्ट के ऑर्डर के 48 घंटे के अंदर फैसला किया जाएगा.
बेंच ने कहा कि इस भयानक घटना के सामाजिक असर को देखते हुए, तीन सदस्यों वाली एसआईटी सबूत मिटाने के आरोपों और डॉक्टर के माता-पिता के घटना को दबाने और कम दिखाने की कोशिश के आरोपों की जांच करेगी.
डॉक्टर के माता-पिता ने अपनी बेटी के रेप और मर्डर की आगे की जांच की मांग करते हुए हाई कोर्ट में अर्जी दी थी. उनका दावा था कि इस भयानक अपराध में एक से अधिक लोग शामिल थे. 20 जनवरी 2025 को इस घटना के सिलसिले में नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.
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