नेता प्रतिपक्ष की मर्यादा से खिलवाड़ का आरोप
कोलकाता 22 मई (आरएनएस)। लम्बे समय से पश्चिम बंगाल की सत्ता में राज करने वाली टीएमसी के नेताओं को अब फर्श पर बैठकर विरोध प्रदर्शन कना पड़ रहा है। विधानसभा में आज उस वक्त हंगामा शुरू हो गया, जब टीएमसी नेताओं ने नेता प्रतिपक्ष के कमरे का आवंटन नहीं होने के विरोध में धरना दे दिया। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि सभी जरूरी दस्तावेज जमा कराने के बावजूद विपक्ष के नेता का कक्ष अब तक नहीं खोला गया। इस मुद्दे को लेकर टीएमसी ने भाजपा पर विपक्ष का अपमान करने और जानबूझकर परेशान करने का आरोप लगाया।
इस विरोध प्रदर्शन में तृणमूल संसदीय दल द्वारा चुने गए नेता प्रतिपक्ष शोभनदेव चट्टोपाध्याय , विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष (स्पीकर) बिमान बनर्जी, पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक पुलक राय और अरूप राय समेत करीब 17 विधायक शामिल थे।
तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि पार्टी के संसदीय दल के फैसले के बारे में पहले ही विधानसभा सचिवालय और अध्यक्ष को पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी। हालांकि, विधानसभा सचिवालय के सूत्रों का दावा है कि टीएमसी द्वारा भेजे गए पहले पत्र या प्रस्ताव (रेज़ोल्यूशन) में यह स्पष्ट नहीं था कि इसमें कितने टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षर या सहमति शामिल है। इस कारण उस पत्र की कानूनी और प्रशासनिक वैधता पर सवाल उठाए गए थे। इस आपत्ति के बाद, तृणमूल संसदीय दल की ओर से एक नया प्रस्ताव तैयार कर विधानसभा में दोबारा जमा किया गया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस नए दस्तावेज़ पर टीएमसी के जीते हुए विधायकों में से 70 विधायकों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। हालांकि, इस नए कागजात को सौंपने के बाद भी विपक्ष के लिए निर्धारित कमरे का ताला नहीं खोला गया। सचिवालय का कहना है कि नवनिर्वाचित अध्यक्ष (स्पीकर) वर्तमान में कूचबिहार के दौरे पर हैं और उनके कोलकाता लौटने के बाद ही इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सचिवालय के इस ढुलमुल रवैये पर पूर्व स्पीकर बिमान बनर्जी ने तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने विधानसभा सचिव (सेक्रेटरी) के कार्यक्षेत्र पर सवाल उठाते हुए कहा, ”विधानसभा के सचिव मीडिया के सामने इस तरह का रुख कैसे व्यक्त कर सकते हैं? इतने लंबे संसदीय इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। क्या अब सचिव ही तय करेंगे कि सदन कैसे चलेगा? अध्यक्ष की भूमिका का क्या हुआ?ÓÓ
बिमान बनर्जी ने सत्ताधारी दल पर निशाना साधते हुए याद दिलाया, ”आप लोगों ने ही तो अध्यक्ष (स्पीकर) के चुनाव वाले दिन शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के रूप में आमंत्रित किया था, ताकि वे संसदीय शिष्टाचार निभाते हुए नवनिर्वाचित अध्यक्ष को उनकी कुर्सी तक सम्मानपूर्वक छोड़ सकें। इसका मतलब है कि उस दिन आपने उन्हें नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी थी, तो फिर आज अचानक ऐसा क्या बदल गया?ÓÓ
बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम पर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने स्पष्ट किया कि यह पार्टी का कोई पहले से तय कार्यक्रम नहीं था। उन्होंने कहा, ”शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कल ही सचिवालय द्वारा मांगी गई अतिरिक्त जानकारी और नया प्रस्ताव जमा कर दिया था। इसलिए सभी को उम्मीद थी कि आज नेता प्रतिपक्ष का कमरा खोल दिया जाएगा। इसी उम्मीद के साथ जो विधायक आसपास थे, वे वहां पहुंचे थे। लेकिन कमरे को बंद पाकर विधायकों का गुस्सा स्वत:स्फूर्त रूप से फूट पड़ा और वे वहीं धरने पर बैठ गए।ÓÓ
अपने दशकों लंबे संसदीय जीवन का हवाला देते हुए खुद शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने भी सरकार और सचिवालय को सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, ”आज शायद आपको लग रहा होगा कि हम सदन में संख्या में महज 80 हैं। लेकिन अगर ये 80 विधायक एक साथ विधानसभा के अंदर और बाहर अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे, तो बहुत कुछ घट सकता है।ÓÓ उन्होंने आगे कहा, ”मैंने लंबे समय तक विपक्ष में राजनीति की है और पिछले 15 साल सत्ता पक्ष में भी रहा हूं, लेकिन संसदीय लोकतंत्र में ऐसी अवांछित और नज़ीरविहीन स्थिति का सामना मुझे अपने पूरे जीवन में कभी नहीं करना पड़ा।ÓÓ
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