हेलसिंगबोर्ग (स्वीडन),22 मई। यूरोप से 5,000 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का आदेश देने के महज कुछ ही सप्ताह बाद पोलैंड में इतने ही सैनिक भेजने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले पर नाटो सहयोगियों और रक्षा अधिकारियों ने शुक्रवार को हैरानी जताई है.
स्वीडन की विदेश मंत्री मारिया माल्मेर स्टेनरगार्ड ने नाटो देशों के विदेश मंत्रियों की एक बैठक के दौरान संवाददाताओं से कहा, यह वास्तव में भ्रमित करने वाला है और इस स्थिति से निपटना हमेशा आसान नहीं होता. इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी शामिल थे.
इस फैसले से खुद अमेरिकी रक्षा अधिकारी भी असमंजस में हैं। संवेदनशील सैन्य मामलों पर चर्चा करने वाले दो अधिकारियों में से एक ने कहा, हमने पिछले दो सप्ताह का अधिकांश समय पहली घोषणा (सैनिकों की वापसी) के बाद की तैयारियों में बिताया है. हमें भी नहीं पता कि इस नए फैसले का क्या मतलब है.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशलÓ पर एक पोस्ट में कहा, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका पोलैंड में अतिरिक्त 5,000 सैनिक भेजेगा.
उन्होंने कहा कि यह निर्णय पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नाव्रोकी के साथ उनके मजबूत संबंधों के कारण लिया गया है, जिनका ट्रंप ने पिछले साल के चुनावों में समर्थन किया था.
ट्रंप और उनके प्रशासन द्वारा यूरोप में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को बढ़ाने के बजाय कम करने के हफ्तों के विरोधाभासी बयानों के बाद राष्ट्रपति का यह बदला हुआ रुख सामने आया है. सैनिकों की तैनाती को लेकर समन्वय बनाए रखने के अमेरिकी वादे के बावजूद नाटो सहयोगियों को इस फैसले की भनक तक नहीं लगी.
इस महीने की शुरुआत में, ट्रंप प्रशासन ने कहा था कि वह यूरोप में सैनिकों की संख्या में लगभग 5,000 की कटौती कर रहा है, और अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की थी कि लगभग 4,000 सैनिकों को अब पोलैंड नहीं भेजा जा रहा है.
वह घोषणा तब की गई थी जब ट्रंप जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मजऱ् की उस टिप्पणी पर भड़क गए थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरानी नेतृत्व द्वारा अमेरिका को अपमानित किया जा रहा है और युद्ध में रणनीति की कमी की आलोचना की थी.
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