देहरादून,22 मई (आरएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में देहरादून में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय ग्रीनहाउस गैस इन्वेंट्री कार्यशाला संपन्न हो गई। कार्यशाला में वैज्ञानिकों के बीच ईंधन का आयात घटाने और पर्यावरण बचाने को लेकर मंथन हुआ। कार्यशाला का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. हरेंद्र सिंह बिष्ट ने किया। सत्रों के दौरान पर्यावरण मंत्रालय के सलाहकार शरत कुमार पल्लेरला, अतिरिक्त निदेशक अजय राघव और भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद के प्रोफेसर अमित गर्ग ने वैश्विक नियमों और भारत के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर मंथन किया। इस दौरान तय किया गया कि भारत वर्ष 2026 के अंत तक अपनी दूसरी और वर्ष 2028 तक तीसरी पारदर्शिता रिपोर्ट समय पर सौंपेगा।इस
ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों (जैसे धनबाद, जादवपुर यूनिवर्सिटी, भारतीय उद्योग परिसंघ) के वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला में ऊर्जा क्षेत्र, सड़क परिवहन, लौह-इस्पात उद्योग और पाइपलाइन परिवहन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन पर तकनीकी चर्चा हुई। इसके साथ ही, केंद्र सरकार के वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए वाहनों के ईंधन में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने और ईंधन आयात घटाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम के समापन पर संस्थान में एक नए सेल्फी पॉइंट का भी उद्घाटन किया गया।
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