101 पार्षदों का इस्तीफा, कई सांसद व विधायकों का हो सकता है भगवाकरण
जगदीश यादव
कोलकाता 26 मई (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल में करारी हार के बाद टीएमसी का कुनबा बिखरने लगा है। एक तरह से पार्टी में आखिरी बात मानी जाने वाली ममता बनर्जी व सेकंड-इन-कमांड अभिषेक बनर्जी दो सप्ताह में ही अर्श से फर्श पर आ जाने वाले हालात में हैं। खासकर सेकंड-इन-कमांड अभिषेक बनर्जी जिनके सामने कोई जुबान भी पूछकर खोलता था आज उन्हें उनके पार्टी के ही नेताओं के द्वारा सवालों के कटघरे रखा गया है।
ममता की पार्टी तृणमूल भाई-भतीजावाद के सवाल से भी उबर नहीं पा रही है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर सुलग रही असंतोष की चिंगारी अब एक बड़े विस्फोट का रूप ले चुकी है, जिसने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि पार्टी के भीतर एक बड़े स्तर पर बगावत शुरू हो गई है, जिसे संभालना अब शीर्ष नेतृत्व के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुका है। इधर बंगाल के तमाम नगरपालिकाओं से तृणमूल के 101 पार्षदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। ये इस्तीफे विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी में अंदरूनी कलह, दलबदल और बगावत काफी बढ़ गए हैं। इसके अलावा कहा जा रही है कि तृणमूल के दर्जनों सांसद व विधायक भी बगावत के मूड में हैं। बता दे कि अबतक उत्तर बैरकपुर नगरपालिका के 15, गारुलिया-18, कंटाई-14, हालीशहर-16, भाटपाड़ा-30, और डायमंड हार्बर नगरपालिका के 8 तृणमूल पार्षदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। बता दे कि , कुछ दिन पहले हमेशा बड़बोले का रुख रखने वाली ममता बनर्जी ने कहा था कि जिन नेताओं को पार्टी छोडऩी है, वो छोड़ सकते हैं। मैं पार्टी फिर खड़ी कर लूंगी। ममता ने यह बयान सत्ता गंवाने के बाद पार्टी नेताओं के साथ हुई एक बैठक में दिया था। ममता ने साफ कहा था कि जो नेता पार्टी छोडऩा चाहते हैं, वे जा सकते हैं। उन्हें किसी के जाने की परवाह नहीं है। वे अकेले दम पर पार्टी को फिर से खड़ा कर लेंगी। वैसे पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज सुबह तब एक खास आहट सुनी गई जब तृणमूल कांग्रेस सांसद काकली घोष दस्तीदार कल्याणी में आयोजित प्रशासनिक बैठक में पहुंचीं। इस बैठक में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या काकली जल्द ही बीजेपी का दामन थाम सकती हैं? काकली घोष दस्तीदार ने इन अटकलों को खारिज करते हुए साफ कहा कि उनका इस बैठक में शामिल होना पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था । सिर्फ यहीं नहीं उक्त बैठक में देगंगा के नवनिर्वाचित तृणमूल विधायक अनीसुर रहमान बिदेश, बदुरिया के बुरहान-उल-मुकोद्दीन (लिटन), स्वरूपनगर की बीना मंडल, बशीरहाट दक्षिण के सुरजीत मित्रा (बादल), मिनाखां की उषारानी मंडल और हरोआ के अब्दुल मतीन जैसे तृणमूल विधायकों के उपस्थित रहने को लेकर यह लगभग साफ होता जा रहा है कि तृणमूल के किले को तो बंगाल में भाजपा ने ढाह दिया है बाकी बची दीवारों में भारी दरकनों से जो बाकी है वह भी ढह जाए तो हैरत की बात नहीं होगी।
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