अयोध्या 27 मई (आरएनएस)। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग में चल रही 20 दिवसीय ग्रीष्मकालीन चित्रकला कार्यशाला का सत्र पूरी तरह से प्रिंट मेकिंग की तकनीकी बारीकियों को समर्पित रहा। इस दौरान विद्यार्थियों ने लिनो-कट तकनीक के सबसे महत्वपूर्ण पड़ावकृइकिंग प्रोसेस का सघन व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कार्यशाला में अतिथि विशेषज्ञ और प्रख्यात कलाकार शिवम वर्मा ने विद्यार्थियों को लिनो-कट ब्लॉक पर स्याही लगाने की कला में निपुण किया। श्री वर्मा ने बताया कि एक बेहतरीन प्रिंट के लिए रबर रोलर द्वारा स्याही को लिनो शीट पर समान रूप से फैलाना और उसके घनत्व को नियंत्रित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों को सिखाया कि कैसे सही मात्रा में इंक लेकर उसे ब्लॉक पर रोल करने से नक्काशी की हुई बारीक रेखाएं उभर कर आती हैं। इस अवसर पर कार्यशाला की मुख्य प्रशिक्षक व आयोजन सचिव डॉ. रीमा सिंह ने कहा, प्रिंट मेकिंग में इकिंग का चरण ही वह क्षण है जहाँ कला का सृजन धरातल पर उतरता है। आज छात्रों ने न केवल इंक की गुणवत्ता और उसके सही अनुपात को समझा, बल्कि उसे पेपर पर प्रिंट लेने की बारीकी को समझा। कार्यशाला संयोजक डॉ. सरिता द्विवेदी ने छात्रों के तकनीकी प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लखनऊ से आए विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही यह ट्रेनिंग छात्रों के भविष्य के पोर्टफोलियो में मील का पत्थर साबित होगी। इस तकनीकी सत्र के दौरान अर्थशास्त्र की वरिष्ठ आचार्या प्रो. प्रिया कुमारी और संगीत विभाग की डॉ. रचना श्रीवास्तव ने विशेष रूप से उपस्थित होकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। अपने आशीर्वचन में प्रो. प्रिया कुमारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि, ष्कला केवल अभ्यास नहीं, बल्कि धैर्य और एकाग्रता का संगम है। आप सभी का यह उत्साह भविष्य में कला जगत में नए मानक स्थापित करेगा।ष् डॉ. रचना श्रीवास्तव ने छात्रों को निरंतर प्रयोगधर्मी रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि प्रिंट मेकिंग की ये बारीकियां आपकी रचनात्मकता को और अधिक मुखर बनाएंगी। इस तकनीकी सत्र में अमन वर्मा, पल्लवी भारती, गौरव यादव, स्तुति, अस्मिता, प्रशांत दूबे, अंशू, अमिता, नितेश, सृष्टि तिवारी, प्रतीक्षा, समीक्षा, अपूर्वा, संध्या, सपना पाल, आकांक्षा और आकर्ष तिवारी सहित 80 विद्यार्थियों ने लिनो-कट ब्लॉक पर इकिंग कर आकर्षक प्रिंट्स तैयार किए। कार्यशाला अब अपने समापन की ओर है, जहाँ प्रतिभागी अपनी इन सीखी हुई विधाओं का वृहद प्रदर्शन करने की तैयारी में जुटे हैं।
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