सीतापुर 27 मई (आरएनएस)। कभी गांवों के करघों तक सीमित रहने वाली सीतापुर की पारंपरिक दरी अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी अलग पहचान बनाने की ओर बढ़ रही है। जिले के बहुचर्चित ओडीओपी उत्पाद दरी उद्योग को नई उड़ान देने के लिए बुधवार को जिला प्रशासन और आईआईएफटी कोलकाता के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह एमओयू जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित ओडीओपी सीएफसी बैठक में संपन्न हुआ। समझौते के तहत अब सीतापुर के दरी कारीगरों को तकनीकी उन्नयन, डिजाइन में नवाचार, निर्यात उन्मुख प्रशिक्षण और सर्टिफिकेट प्रोग्राम उपलब्ध कराए जाएंगे। वर्षों से पारंपरिक तरीके से दरी बुन रहे कारीगरों को अब आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किया जाएगा, जिससे उनके उत्पाद देश-विदेश के बड़े बाजारों तक पहुंच सकें। सीतापुर की दरी अपनी मजबूत बुनावट, पारंपरिक डिजाइन और हस्तनिर्मित गुणवत्ता के लिए लंबे समय से पहचान रखती है। जिले के कई गांवों में हजारों परिवार इस उद्योग से जुड़े हैं, लेकिन उचित मार्केटिंग और आधुनिक तकनीक के अभाव में यह उद्योग अपेक्षित पहचान नहीं बना सका। अब आईआईएफटी कोलकाता के सहयोग से कारीगरों को ई-कॉमर्स, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट की जानकारी भी दी जाएगी। जिला प्रशासन के मुताबिक अक्टूबर-नवंबर में प्रस्तावित बायर-सेलर मीट के आयोजन में भी यह समझौता अहम भूमिका निभाएगा। इससे सीतापुर की दरी सीधे बड़े कारोबारियों और निर्यातकों तक पहुंच सकेगी। प्रशासन को उम्मीद है कि यह पहल न सिर्फ दरी उद्योग को नई पहचान देगी, बल्कि हजारों कारीगर परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत करेगी।
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