महासमुंद 28 मई (आरएनएस) “सरकारी सुपुर्दगी में रखे गए एलपीजी टैंकर खाली होते रहे, फर्जी पंचनामे बनते रहे और करोड़ों की गैस काले बाजार में बिकती रही”, महासमुंद के बहुचर्चित एलपीजी गबन केस में पुलिस ने ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पुलिस ने फरार चल रहे ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और उसके बेटे सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया कि यह पूरा खेल 19 मार्च 2026 से ही शुरू हो चुका था, जबकि सुपुर्दनामा 30 मार्च को हुआ। थाना सिंघोडा में जप्त 6 एलपीजी कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षा के नाम पर ठाकुर पेट्रोकेमिकल उरला रायपुर भेजा गया था, लेकिन वहां पहुंचते ही गैस की हेराफेरी शुरू हो गई। पुलिस के मुताबिक 87 टन एलपीजी गैस जिसकी कीमत करीब 77 लाख रुपये थी, उसे योजनाबद्ध तरीके से गायब किया गया। जांच में खाद्य अधिकारी अजय यादव को इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया गया है, जबकि पंकज चंद्राकर सौदेबाजी का चेहरा बना हुआ था। मनीष चौधरी विभिन्न एजेंसियों के बीच मध्यस्थता कर रहा था। खुलासा हुआ कि पहले इस गबन सौदे के लिए 1 करोड़ 30 लाख रुपये की मांग की गई थी, लेकिन लगातार मोलभाव के बाद डील 90 लाख रुपये में फाइनल हुई। सभी कैप्सूल खाली होने के बाद 6 से 8 अप्रैल के बीच फर्जी तौल पंचनामा तैयार किया गया और मुख्य षड्यंत्रकारियों को ही गवाह बना दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि अप्रैल महीने में सिर्फ 40 टन एलपीजी खरीदी गई, लेकिन 135 टन गैस अलग-अलग एजेंसियों और संस्थानों को बिना GST कच्चे बिल पर बेच दी गई। फरारी के दौरान संतोष सिंह ठाकुर पिता स्व. मूल सिंह ठाकुर उम्र 57 वर्ष और उसका बेटा सार्थक सिंह ठाकुर उम्र 27 वर्ष निवासी शांति विहार कॉलोनी डगनिया थाना डीडी नगर रायपुर लगातार शहर बदलते रहे। रायपुर, कवर्धा, कान्हा-किसली, कोलकाता, पुणे, मुंबई और आखिर में कोल्हापुर में छिपे होने की जानकारी मिली। पुलिस ने 11 शहरों के टावर डंप, सीडीआर, टोल प्लाजा डाटा, सोशल मीडिया एक्टिविटी और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन खंगालने के बाद दोनों को न्यू चालुक्य होटल कोल्हापुर से दबोचा। आरोपी के कब्जे से 20 हजार रुपये नगद भी जप्त किए गए। इससे पहले निखिल वैष्णव, पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और खाद्य अधिकारी अजय यादव गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस का कहना है कि जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं और इस गैस सिंडिकेट में कई और बड़े नाम बेनकाब हो सकते हैं। फिलहाल महासमुंद का यह एलपीजी गबन कांड अब सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं बल्कि सिस्टम, कारोबार और भ्रष्ट गठजोड़ की सबसे बड़ी मिसाल बन चुका है।
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