० नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप और भारतीय ज्ञान परंपरा को मिला नया आधार
रायपुर, 29 मई (आरएनएस)। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में गुरुवार को शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता तथा सतत विकास से जुड़ी सात महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास समारोह आयोजित किए गए। इन परियोजनाओं के माध्यम से संस्थान की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं नवाचार संबंधी क्षमताओं को नई मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे ने की। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव, डीन, प्राध्यापकगण, कर्मचारी, छात्र, पूर्व छात्र एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
समारोह में चार नई सुविधाओं का उद्घाटन तथा तीन प्रमुख परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा ‘विकसित भारत-2047Ó की परिकल्पना के अनुरूप उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान गोल्डन टॉवर की दूसरी मंजिल पर लगभग 5,500 वर्गफुट क्षेत्र में विकसित एनआईटी रायपुर एफआईई इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया। लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से स्थापित यह छत्तीसगढ़ का पहला विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) समर्थित टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर है। वर्तमान में यह केंद्र क्लीन-टेक, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा बहुविषयक तकनीकी एकीकरण से जुड़े 50 से अधिक स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान कर रहा है।
इसके साथ ही गोल्डन टॉवर के सामने सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन का शुभारंभ भी किया गया। विद्युत मंत्रालय की रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल योजना के अंतर्गत स्थापित इस सुविधा में 60 किलोवाट क्षमता तक के दो एसी/डीसी चार्जर लगाए गए हैं। यह परियोजना स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
समारोह में गोल्डन टॉवर के समीप उच्च-वोल्टेज इम्पल्स परीक्षण प्रयोगशाला की आधारशिला भी रखी गई। लगभग 9.12 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस जी+2 परियोजना के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीटीसीएल) द्वारा एक करोड़ रुपये की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) सहायता प्रदान की गई है। प्रस्तावित प्रयोगशाला विद्युत प्रणाली अभियांत्रिकी एवं उच्च-वोल्टेज अनुप्रयोगों में अनुसंधान, परीक्षण एवं प्रशिक्षण को नई दिशा देगी। परियोजना के अगले 15 माह में पूर्ण होने की संभावना है।
संस्थान के प्लेटिनम जुबली वर्ष के उपलक्ष्य में प्लेटिनम अतिथि गृह का भी शिलान्यास किया गया। लगभग 13.27 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह जी+5 भवन 20 सुसज्जित कमरों, सम्मेलन कक्ष तथा आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा। इससे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अतिथियों, विशेषज्ञों तथा गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत एवं आवास की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। परियोजना के 18 माह में पूर्ण होने की संभावना है।
इसके अतिरिक्त लगभग 25.57 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नए जी+6 अकादमिक एनेक्स-ढ्ढ भवन का उद्घाटन किया गया। लगभग 4,800 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र वाले इस भवन में 35 कक्ष बनाए गए हैं, जिनमें विभिन्न विभागों की कक्षाएँ एवं एनआईटीआरआर-एफआईई इनक्यूबेशन सेंटर संचालित होंगे।
समारोह के दौरान अकादमिक एनेक्स-ढ्ढ के पीछे प्रस्तावित मेकस्र्पेस एवं अनुसंधान सुविधा भवन की आधारशिला भी रखी गई। लगभग 16.91 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस जी+2 भवन में मेकस्र्पेस एवं टिंकरिंग प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी, जिससे नवाचार एवं प्रोटोटाइप विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके साथ ही उन्नत अनुसंधान कार्यों के लिए समर्पित अनुसंधान परियोजना ब्लॉक भी विकसित किया जाएगा। यह परियोजना अगले 12 माह में पूर्ण होने की संभावना है।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण केंद्रीय पुस्तकालय में भारतीय ज्ञान परंपरा अनुभाग का शुभारंभ रहा। भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र द्वारा स्थापित इस पुस्तकालय में भारतीय दर्शन, विज्ञान, साहित्य, गणित, आयुर्वेद, वास्तु, योग एवं अन्य पारंपरिक ज्ञान-विषयों से संबंधित पुस्तकें, पांडुलिपियाँ, जर्नल एवं संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराई गई हैं। इसका उद्देश्य पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान से जोडऩा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं अकादमिक अध्ययन को प्रोत्साहित करना है।
इस अवसर पर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे ने संस्थान की योजना एवं विकास टीम की समयबद्ध कार्यान्वयन क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि एनआईटी रायपुर नवाचार, समावेशिता, सतत विकास एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर आधारित आधुनिक परिसर के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
संस्थान के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने कहा कि स्टार्टअप इनक्यूबेशन, सतत परिवहन, उच्च-वोल्टेज अनुसंधान, अतिथि-सत्कार, शैक्षणिक अधोसंरचना, मेकरस्पेस आधारित नवाचार तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी नई सुविधाएँ संस्थान की दूरदर्शी एवं समग्र विकास नीति को प्रतिबिंबित करती हैं। उन्होंने इन परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन में योगदान देने वाले सभी हितधारकों को बधाई दी।
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