जशपुर 30 मई (आरएनएस) जिस योजना का मकसद गरीब और प्रतिभावान बच्चों को बेहतर शिक्षा देना था, उसी योजना में फर्जीवाड़ा कर एक शासकीय शिक्षक ने अपनी बेटी का मुफ्त प्रवेश करा दिया। सालाना लाखों रुपये वेतन पाने के बावजूद खुद को कम आय वाला बताकर शासकीय योजना का लाभ लेने का यह मामला सामने आते ही जशपुर पुलिस हरकत में आई और आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
मामला जशपुर जिले के पत्थलगांव थाना क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता ददिबल प्रसाद विश्वकर्मा (43 वर्ष), निवासी शांति नगर कांसाबेल ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर बताया कि ग्राम जामझोर, तहसील पत्थलगांव निवासी शासकीय शिक्षक चमर साय पैकरा ने अपनी वास्तविक आय छिपाकर मात्र 75 हजार रुपये वार्षिक आय का प्रमाण पत्र बनवाया और मिथ्या शपथ पत्र प्रस्तुत कर अपनी पुत्री को पंडित जवाहरलाल नेहरू उत्कर्ष योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2024-25 में कक्षा छठवीं में निःशुल्क अध्ययन के लिए प्रवेश दिला दिया।
शिकायत मिलने के बाद पत्थलगांव पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त वेतन संबंधी दस्तावेजों का परीक्षण किया गया, जिसमें आरोपी शिक्षक की वार्षिक आय लगभग 6 लाख 79 हजार 471 रुपये पाई गई। वहीं आदिवासी विकास विभाग से प्राप्त जानकारी और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों ने भी यह स्पष्ट कर दिया कि आरोपी ने स्वयं को कृषक बताते हुए अपनी वास्तविक आय छिपाई और गलत जानकारी देकर शासकीय योजना का अनुचित लाभ हासिल किया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी की इस धोखाधड़ी से योजना के वास्तविक पात्र, आर्थिक रूप से कमजोर और प्रतिभावान विद्यार्थियों के अवसर प्रभावित हुए। यानी जिस सीट और सुविधा पर किसी जरूरतमंद छात्र का अधिकार था, उसका लाभ गलत तरीके से हासिल किया गया।
पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पत्थलगांव थाना में अपराध क्रमांक 55/2026 के तहत धारा 318(4) भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत मामला दर्ज कर विवेचना की गई। जांच में आरोप प्रमाणित होने पर 30 मई 2026 को दोपहर 12:10 बजे आरोपी चमर साय पैकरा (41 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
जशपुर पुलिस अधीक्षक डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में निरीक्षक विनीत कुमार पाण्डेय, सहायक उप निरीक्षक लखेश कुमार साहू, आरक्षक राजेन्द्र रात्रे तथा साइबर सेल टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने स्पष्ट कहा है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं में फर्जी दस्तावेज, मिथ्या जानकारी या किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी कर लाभ लेने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
बहरहाल, यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं बल्कि उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है जो गरीबों और जरूरतमंद विद्यार्थियों का हक छीनकर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने की कोशिश करते हैं, क्योंकि अब ऐसे फर्जीवाड़े पर कानून की नजर और पुलिस की कार्रवाई दोनों बराबर सख्त हैं।

