सीतापुर। गांव की गलियों से निकलकर महमूदाबाद के सद्दूपुर गांव का बेटा निखिल मौर्य अब देश की प्रतिष्ठित तकनीकी संस्था आइआइटी में दाखिला लेकर इंजीनियर बनेगा। उसने जेईई एडवांस की परीक्षा न सिर्फ उत्तीर्ण की बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर 5513 की अच्छी रैंक भी हासिल की है।
इसके लिए निखिल के साथ ही उनके पिता ने भी कड़ी मेहनत की। निखिल जहां 13 वर्ष आयु में घर छोड़कर महमूदाबाद में अकेले रुककर पढ़ाई की, वहीं उनके पिता नीरज कुमार ने आटो चलाकर उनकी पढ़ाई में दिक्कत नहीं आने दी। जेईई एडवांस की तैयारी के लिए कोटा भी भेजा।
नीरज के पास दो बीघा खेत है। उनका गांव महमूदाबाद से करीब 15 किलोमीटर है। बावजूद इसके कक्षा पांच पास करने के बाद उन्होंने निखिल का दाखिला महमूदाबाद के सीता इंटर कालेज में करवा दिया। निखिल कक्षा आठ तक गांव से आकर पढ़ाई की। निखिल की लगन को देखकर कालेज के प्रबंधक रमेश बाजपेयी ने भी विभिन्न आयामों में उनका सहयोग किया।
कक्षा नौ के बाद निखिल महमूदाबाद में ही रुककर अध्ययन करने लगे। वह किराए के कमरे में रुककर स्वयं भोजन बनाते थे। वर्ष 2025 में उन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा में 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। उनके पिता ने उन्हें राजस्थान के कोटा में तैयारी के लिए भेज दिया।
आईआईटी कानपुर से बीटेक कर चुके महोली के आशुतोष ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर 5513 अच्छी रैंक मानी जाती है। इस रैंक के विद्यार्थियों को टाप ब्रांच मिल जाती है। इसमें कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल शामिल हैं।
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