हरिद्वार,04 जून(आरएनएस)। भेल के श्री वर्धमान दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित श्रवण संस्कृति संस्कार सेवा शिविर में बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोडऩे पर जोर दिया जा रहा है। जैन जागृति महिला मंडल की ओर से आयोजित शिविर में बच्चे ही नहीं, बल्कि बड़े भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर संस्कारों और जीवन मूल्यों की सीख ले रहे हैं। शिविर के प्रात:कालीन सत्र में बच्चों को पूजा-पाठ, जैन धर्म के मूल सिद्धांत, नैतिक शिक्षा और अनुशासित जीवनशैली के बारे में जानकारी दी जा रही है। साथ ही उन्हें मोबाइल की बढ़ती लत से दूर रहकर योग, अध्ययन और सकारात्मक दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सायंकालीन सत्र में समाज के वरिष्ठजनों को भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है। शिविर में सांगानेर से आए विद्वान अभिषेक शास्त्री और गौरव शास्त्री प्रतिभागियों को जैन धर्म की परंपराओं, धार्मिक आचरण और संस्कारों के महत्व की जानकारी दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में बच्चों और युवाओं में धार्मिक चेतना तथा नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित की जा रही है। आयोजकों का कहना है कि शिविर का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और धार्मिक विरासत से जोडऩा है। जैन जागृति महिला मंडल की अध्यक्ष अर्चना जैन ने बताया कि वर्तमान समय में बच्चों को संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों से जोडऩा बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिविर के माध्यम से बच्चों और युवाओं को जैन धर्म के आदर्शों तथा संस्कारित जीवन के महत्व से परिचित कराया जा रहा है। छह जून को प्रतिभागियों की परीक्षा आयोजित की जाएगी, जबकि सात जून को समापन समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर संरक्षक ओपी जैन, पीके जैन, सचिव अमित जैन, सचिन जैन, संदीप जैन, बलकेश जैन, रवि जैन, पीयूष जैन, रुचिन जैन, विनय जैन सहित शहर के आठों जैन मंदिरों के पदाधिकारी मौजूद रहे। बच्चों में सुपार्श जैन, सक्षम जैन, सम्यक जैन और हर्ष जैन ने सक्रिय सहभागिता की। शिविर के सफल संचालन में अंजली जैन, कविता जैन, हेमा जैन, इशिका जैन, कल्पना जैन, शैली जैन, मोना जैन, कामिनी जैन, नमिता जैन, कोमल जैन, नेहा जैन और रीता जैन सहित अनेक महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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