हरिद्वार,04 जून(आरएनएस)। सनातन संस्कृति, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में पतंजलि योगपीठ ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इंडोनेशिया दौरे पर गए पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण की मौजूदगी में पतंजलि योगपीठ और इंडोनेशिया के एकमात्र हिंदू विवि यूनिवर्सिटास हिंदू नेगरी (यूएचएन) के बीच ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते को दोनों देशों के बीच शिक्षा, शोध और सांस्कृतिक सहयोग के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। बाली में हुए इस समझौते के तहत दोनों संस्थान छात्रों के लिए शैक्षणिक आदान-प्रदान, शोध गतिविधियों और योग प्रतियोगिताओं के आयोजन में सहयोग करेंगे। 35 संकायों का संचालन करने वाले यूएचएन विश्वविद्यालय और पतंजलि विश्वविद्यालय के बीच यह साझेदारी योग, आयुर्वेद और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार को नई गति देगी। प्रोफेसर डॉ. गुस्ती न्गुराह सुदियाना और प्रोफेसर माडे पूर्णामा ने आचार्य बालकृष्ण एवं उनकी टीम का स्वागत किया। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि जल्द ही इंडोनेशिया में शिक्षा, योग और सनातन संस्कृति के विस्तार के लिए व्यापक स्तर पर कार्य शुरू करेगा। उन्होंने इसे भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने वाला कदम बताया। इस अवसर पर बाली के विधायक डॉ. सोमवीर भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान बाली प्रांत के विधानसभा अध्यक्ष देवा माडे महायज्ञ ने पतंजलि के उत्पादों और कार्यों की सराहना करते हुए शीघ्र ही पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार आने की इच्छा जताई। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्र में पतंजलि के साथ मिलकर कार्य करने की भी इच्छा व्यक्त की। इंडोनेशिया प्रवास के दौरान आचार्य बालकृष्ण ने बाली की संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और विकास मॉडल का भी अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि बाली के इको-फ्रेंडली विकास मॉडल से प्रेरणा लेकर उत्तराखंड के पौड़ी जनपद स्थित धन्वंतरि धाम माला गांव को भी विकसित किया जाएगा।
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