मेरठ 5 जून (आरएनएस )। कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर धोखाधड़ी से भी अलेक रजा व शुभम चौधरी के संबंध उजागर हुए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (श्वष्ठ) ने भारत और कंबोडिया में सक्रिय एक संगठित गिरोह के खिलाफ मनी लांड्रिंग की जांच के तहत आरोपितों से पूछताछ की।
यह गिरोह मानव तस्करी, साइबर अपराध से अर्जित धन को वैध बनाने यानि मनी लांड्रिंग में शामिल है। ईडी को मिली खुफिया सूचनाओं के आधार पर राज्य पुलिस के सहयोग से संदिग्ध व्यक्तियों और उनके आवासों की तलाशी का अभियान चलाया गया। अलेक रजा और शुभम चौधरी विदेश में आकर्षक रोजगार दिलाने का झांसा देकर लोगों को कंबोडिया भेजने में मदद करते थे।
जांच एजेंसियों का मानना है कि काफी संख्या में भारतीय नागरिकों को नौकरी के नाम पर विदेश ले जाकर जबरन साइबर धोखाधड़ी जैसे अवैध कार्यों में लगाया जाता है। ईडी का यह मामला दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे और चार्जशीट के आधार पर दर्ज किया गया है। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन और अपराध से अर्जित संपत्तियों की भी जांच कर रही है।
ईडी की दो टीमों ने अलेक रजा के आवास मवाना और शुभम चौधरी के निवास सांधन पर पहुंचकर पड़ताल की है। साथ ही नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन और अपराध से अर्जित संपत्तियों की भी जांच शुरू कर दी है। अलेक रजा और उसके पिता से ईडी की टीम ने घंटों पूछताछ की। उनके बैंक खातों और संपत्तियों की जांच की गई है। साथ ही शुभम चौधरी के परिवार से भी बैंक खातों के अलावा संपत्ति के बारे में जानकारी जुटाई गई।
ईडी को संदेह है कि दोनों आरोपित अवैध तरीके से कमाई गई रकम को अपने रिश्तेदारों को भी मुहैया करा सकते हैं। इसलिए इस पूरे नेटवर्क को तोडऩे के लिए ईडी दोनों आरोपितों के बारे में गहन पड़ताल कर रही है। एसपी देहात अभिजीत कुमार ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस को तैनात किया गया था। ईडी के अधिकारियों ने बताया कि 2024 का मामला है, जिसमें अलेक रजा को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजा गया था, लेकिन वह फिलहाल जमानत पर है।
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