लखनऊ 9 जून (आरएनएस )। राजधानी में आयोजित 9 दिवसीय रामकथा महोत्सव के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि जिनके मन में भारत के प्रति आस्था और निष्ठा नहीं है, जो भारतीय संस्कारों का सम्मान नहीं कर सकते, उनके लिए भारत की धरती केवल एक धर्मशाला नहीं हो सकती। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रभु श्रीराम से द्रोह करने वालों को कभी स्वीकार्यता नहीं मिली और समाज को आज भी ऐसी नकारात्मक और विभाजनकारी शक्तियों से सतर्क रहने की आवश्यकता है।मुख्यमंत्री सीतापुर रोड स्थित सेवा अस्पताल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में रामभक्तों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने रामकथा का श्रवण भी किया, जिसका वाचन तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि उसे जीवन में आत्मसात करना ही वास्तविक उद्देश्य है।सीएम योगी ने कहा कि संतों ने सदैव समाज को जोडऩे और राष्ट्र को मजबूत बनाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि आंदोलन भारतीय अस्मिता और आस्था का प्रतीक रहा है, जिसे न्यायालय ने भी ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर स्वीकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान श्रीराम उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक भारत को एकता के सूत्र में जोड़ते हैं।अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राम नाम की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि जीवन की हर समस्या का समाधान राम नाम में निहित है। उन्होंने कहा कि संत समाज का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक साधना नहीं, बल्कि राष्ट्र कल्याण और लोकमंगल भी है। उन्होंने तुलसीपीठाधीश्वर रामभद्राचार्य के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे अपने जीवन के माध्यम से समाज को निरंतर दिशा दे रहे हैं और दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में उदाहरण प्रस्तुत किया है।सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास में जब भी नकारात्मक शक्तियां प्रभावी हुई हैं, उन्होंने समाज और व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे तत्व शिक्षण संस्थानों और शोध केंद्रों को भी प्रभावित करने का प्रयास करते हैं, इसलिए समाज को सजग रहना आवश्यक है।मुख्यमंत्री ने समाज में फैल रही विभाजनकारी प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर समाज को बांटने का प्रयास किया जाता है, जबकि भारत की संत परंपरा हमेशा एकता और समरसता का संदेश देती रही है। उन्होंने कहा कि राम और शिव के आदर्शों को जीवन में अपनाकर ही समाज और राष्ट्र का कल्याण संभव है।अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी गरिमा की रक्षा और सामाजिक सुरक्षा के लिए समाज को सजग रहना होगा। उन्होंने कहा कि नकारात्मक और अवैध गतिविधियों के खिलाफ समाज को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रामद्रोह करने वालों का इतिहास कभी सकारात्मक नहीं रहा, जबकि राम के आदर्शों को अपनाने वाले सदैव पूजनीय बने।कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने स्वामी रामभद्राचार्य के आगामी साधना काल के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि उनकी साधना राष्ट्र और समाज के कल्याण में सहायक सिद्ध हो। इस अवसर पर विधायक नीरज बोरा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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