लखनऊ, 09 जून 2026। जनसामान्य को सुलभ, त्वरित एवं किफायती न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित स्थायी लोक अदालत (परमानेंट लोक अदालत) जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों के निस्तारण में एक प्रभावी मंच के रूप में उभर रही है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के प्रभारी सचिव अभिषेक गुप्ता ने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत गठित यह व्यवस्था नागरिकों को लंबी एवं खर्चीली न्यायिक प्रक्रिया से राहत प्रदान करते हुए शीघ्र न्याय सुनिश्चित करती है।उन्होंने बताया कि स्थायी लोक अदालत में परिवहन, डाक एवं दूरसंचार, विद्युत एवं जलापूर्ति, सार्वजनिक स्वच्छता, अस्पताल एवं औषधालय सेवाएं, बीमा सेवाएं, शैक्षणिक संस्थान तथा आवास संबंधी सेवाओं से जुड़े विवादों का निस्तारण किया जाता है। यह मंच आमजन को न्यायालयों में लंबित मामलों की अपेक्षा कम समय में समाधान उपलब्ध कराता है।प्रभारी सचिव ने कहा कि स्थायी लोक अदालत की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें सर्वप्रथम पक्षकारों के बीच सुलह एवं समझौते का प्रयास किया जाता है। यदि समझौता संभव नहीं होता है तो अदालत को विवाद के गुण-दोष के आधार पर निर्णय देने का अधिकार प्राप्त होता है, जिससे न्याय प्रक्रिया अधिक सरल एवं प्रभावी बनती है।उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था में किसी प्रकार का न्यायालय शुल्क देय नहीं होता तथा कार्यवाही अपेक्षाकृत कम औपचारिक और नागरिकों के अनुकूल होती है। यह प्रणाली न केवल विवादों का शीघ्र निस्तारण करती है बल्कि पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अभिषेक गुप्ता ने जनपदवासियों से अपील की कि जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित किसी भी विवाद की स्थिति में स्थायी लोक अदालत का लाभ अवश्य उठाएं और त्वरित, सस्ता एवं प्रभावी न्याय प्राप्त करें। उन्होंने बताया कि अधिक जानकारी हेतु इच्छुक व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, एडीआर भवन, भूतल, पारिवारिक न्यायालय परिसर, लखनऊ से संपर्क कर सकते हैं अथवा हेल्पलाइन नंबर 15100 पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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