लखनऊ, 09 जून 2026। प्रदेश सरकार ने ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के 31 स्मारकों एवं स्थलों को संरक्षित घोषित किए जाने की दिशा में प्रथम अधिसूचना जारी कर दी है। ये सभी स्थल उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्थित हैं और राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश पुरातत्व परामर्शदात्री समिति की संस्तुति के आधार पर इन स्थलों को संरक्षित सूची में शामिल करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। उन्होंने कहा कि इन स्मारकों में सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी, कानपुर नगर, रायबरेली, प्रतापगढ़, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, देवरिया, झांसी, जालौन, ललितपुर, महोबा, गाजीपुर, वाराणसी, आगरा एवं मैनपुरी जनपदों के ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं।उन्होंने बताया कि सीतापुर के नवीनगर स्थित शिव मंदिर व कुंड, उन्नाव के नेवरना स्थित माहेपासी का टीला, हरदोई के संडीला क्षेत्र स्थित नागेश्वर मंदिर, बाराबंकी के असैनही स्थित राजाकुंवर गिरधारी सिंह की समाधि व बारादरी, कानपुर नगर के बकेसरा स्थित पंचमुखी शिव मंदिर तथा कटरी बिठूर कला का प्राचीन शिव मंदिर संरक्षित सूची में शामिल किए गए हैं। इसी क्रम में रायबरेली के डलमऊ स्थित गंगकुंड भी इसमें शामिल है।प्रतापगढ़ के रामपुर बेला स्थित प्राचीन शिव मंदिर तालाब, फतेहपुर के बिंदकी क्षेत्र स्थित राधाकृष्ण मंदिर एवं पासी बाबा का मंदिर, सिद्धार्थनगर के बर्डपुर क्षेत्र से संबंधित स्थल, महाराजगंज के खड़कौला टीला तथा देवरिया के खुदिया बुजुर्ग टीला को भी संरक्षित घोषित किया गया है।
झांसी के ऐतिहासिक गढ़वई दुर्ग, हजारिया महादेव मंदिर, यज्ञशाला/लक्ष्मणशाला शिव मंदिर तथा जालौन के रामजानकी हनुमान मंदिर, लटकबिहारी मंदिर, सराफी मंदिर, मदर घाट शिवालय एवं सूर्य मंदिर को भी इस सूची में स्थान मिला है।ललितपुर के सीरीन स्थित प्राचीन बावली एवं चरखारी-मंगलगढ़ किला, महोबा का ऐतिहासिक स्थल, गाजीपुर का पंच मंदिर, वाराणसी के असवारी स्थित शिव मंदिर तथा एलटी कॉलेज परिसर स्थित गोपाल लाल विला, आगरा के बाह स्थित हतकांत का किला एवं मैनपुरी के करहल स्थित खेड़ा का टीला भी संरक्षित घोषित स्थलों में शामिल हैं।मंत्री ने कहा कि ये सभी स्थल इतिहास, संस्कृति और सभ्यता के गौरवशाली अध्यायों को समेटे हुए हैं। इन्हें संरक्षित कर भावी पीढिय़ों तक सुरक्षित रूप में पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इन स्थलों के संरक्षण एवं विकास की कार्यवाही शीघ्र प्रारंभ की जाएगी, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिल सके।
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