लखनऊ, 09 जून 2026। उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन क्षेत्र को संगठित, लाभकारी एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विकसित करने की दिशा में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन (एसटीसी) द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में संघीय दुग्ध उत्पादक कंपनी के गठन को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।बैठक की अध्यक्षता मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एसटीसी, मनोज कुमार सिंह (आईएएस सेवानिवृत्त) ने की। इस अवसर पर पशुधन, डेयरी एवं मत्स्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम, दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के., यूपीएसआरएलएम की मिशन निदेशक दीपा रंजन सहित विभिन्न दुग्ध उत्पादक कंपनियों एवं डेलॉइट के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।बैठक में राज्य के दुग्ध उत्पादन क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार, मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों की संभावनाओं तथा किसानों की आय में वृद्धि के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह भी रेखांकित किया गया कि देश के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में संगठित दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता अभी अपनी पूर्ण क्षमता तक नहीं पहुंच सकी है।यूपीएसआरएलएम द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार राज्य की पांच दुग्ध उत्पादक कंपनियां वर्तमान में 31 जनपदों एवं 6,493 ग्राम पंचायतों में सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 3.81 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन कंपनियों का कुल कारोबार लगभग 5,277 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।डेलॉइट के प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि केवल तरल दूध व्यापार की तुलना में मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पाद किसानों को अधिक आर्थिक लाभ एवं संस्थागत स्थिरता प्रदान कर सकते हैं। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि ऐसे मॉडल में लाभ और वित्तीय प्रदर्शन (श्वक्चढ्ढञ्जष्ठ्र) अपेक्षाकृत अधिक रहता है।बैठक में संघीय संरचना के माध्यम से प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, विपणन और बाजार विस्तार को मजबूत करने पर सहमति बनी, जिससे किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। कई दुग्ध उत्पादक कंपनियों ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे दीर्घकालिक आय वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि कुछ ने चरणबद्ध और समन्वित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।अपर मुख्य सचिव ने दुग्ध गुणवत्ता सुधार, मिलावट नियंत्रण और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश संघीय दुग्ध उत्पादक कंपनी की दिशा में आगे बढ़ेगा और इच्छुक कंपनियां स्वेच्छा से इसमें शामिल हो सकेंगी।उन्होंने निर्देश दिए कि इस प्रस्ताव के लिए एक विस्तृत रणनीतिक दस्तावेज और कार्यान्वयन रोडमैप शीघ्र तैयार किया जाए, ताकि राज्य में दुग्ध क्षेत्र को नई मजबूती और दिशा मिल सके।
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