लखनऊ, (आरएनएस ) 09 जून, 2026। उत्तर प्रदेश में नीली क्रांति को गति देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र एवं राज्य सरकार की मत्स्य संपदा योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य पारंपरिक मछुआरों, मत्स्य पालकों तथा ग्रामीण युवाओं को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है।केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मत्स्य पालन क्षेत्र में आधारभूत संरचना विकास, बायोफ्लॉक प्रणाली तथा रीसक्र्युलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के तहत नए तालाब निर्माण एवं मत्स्य पालन परियोजनाओं पर सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लाभार्थियों को 40 प्रतिशत तथा महिला, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को 60 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जा रहा है। साथ ही सघन मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के लिए एयरेशन सिस्टम जैसी तकनीकों पर भी विशेष सहायता दी जा रही है।इसी के साथ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना संचालित की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्राम सभा के पट्टे पर आवंटित तालाबों का वैज्ञानिक एवं अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। इस योजना के तहत तालाबों के जीर्णोद्धार, बीज, खाद एवं फीड जैसी आवश्यकताओं के लिए सभी वर्गों के लाभार्थियों को 40 प्रतिशत तक निवेश सहायता दी जा रही है। वहीं निषादराज बोट योजना के अंतर्गत पारंपरिक मछुआरों को नाव एवं जाल खरीदने के लिए 40 से 60 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त मोपेड विद आइसबॉक्स जैसी सुविधाओं के माध्यम से मछली विपणन व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा रहा है।इन योजनाओं के प्रभाव से प्रदेश में कई ग्रामीण उद्यमी आत्मनिर्भरता की दिशा में नई उपलब्धियां दर्ज कर रहे हैं। जनपद हाथरस के विकास खण्ड सहपऊ के ग्राम खोन्डा निवासी उद्यमी कल्पना ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बायोफ्लॉक तालाब स्थापित कर लगभग 100 क्विंटल वार्षिक उत्पादन प्राप्त किया है, जिससे उन्हें 2.50 से 3 लाख रुपये तक की शुद्ध आय अर्जित हो रही है। उनके इस प्रयास से क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।इसी प्रकार हाथरस के ही ग्राम रामगढ़ निवासी रक्षपाल सिंह ने रीसक्र्युलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम स्थापित कर आधुनिक मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया है। इससे उन्हें स्थिर आय के साथ ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन में भी सफलता मिली है। वहीं पुरदिलनगर की महिला उद्यमी चेतना सिंह ने भी इसी तकनीक के माध्यम से सफल मत्स्य पालन कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।इन सफलताओं से स्पष्ट है कि वैज्ञानिक तकनीक और सरकारी योजनाओं के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन एक लाभकारी उद्यम के रूप में उभर रहा है। सरकार द्वारा मत्स्य किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कम ब्याज दर पर ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे किसानों को कार्यशील पूंजी की समस्या का समाधान मिल रहा है।मत्स्य विभाग के अनुसार इन सभी योजनाओं का लाभ पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ये प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर भारतÓ के लक्ष्य को भी गति प्रदान कर रहे हैं।
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