1992 का पास नक्शा छुपाकर 2026 में फिर से स्वीकृति
अब उठेगा निर्माण पर बुलडोजर
सुल्तानपुर 10 जून (आरएनएस )। ग्राम नरायनपुर में गाटा संख्या-360/368 को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। बिन्दु सिंह पत्नी कमलभान सिंह ने नियत प्राधिकारी/उपजिलाधिकारी सदर के यहां शपथ पत्र देकर दावा किया कि संबंधित भूमि का नक्शा स्वीकृति हेतु प्रस्तुत किया गया जो 24 अप्रैल 2026 को नक्शा संख्या-173/26 के रूप में पास हो गया। लेकिन अब इसी हलफनामे पर सवालों का पहाड़ खड़ा हो गया है।
आरोप है कि गाटा संख्या-368 का नक्शा पहले ही 02 जनवरी 1992 को नक्शा संख्या-421/91 पर स्वीकृत कराया जा चुका था जिसे जानबूझकर छिपा लिया गया। इसके बाद 360 और 368 का समेकित नक्शा पास कराकर लगभग 2400 वर्गफीट क्षेत्र को वैध दिखाने की कोशिश की गयी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गाटा संख्या-360 में मात्र 600 वर्गफीट भूमि ही क्रय की गयी थी तो फिर 2400 वर्गफीट का नक्शा आखिर किस आधार पर स्वीकृत हुआ। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस समेकित नक्शे की आड़ में खुशी पाण्डेय पुत्री स्व0 श्याम नारायण पाण्डेय की डेढ़ बिस्वा जमीन पर कब्जे की तैयारी की जा रही थी। मामला अब सीधे त्.ठ.व्. ।बज की धारा-7। तक पहुंच चुका है। खुशी पाण्डेय द्वारा नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र में दर्खास्त देकर नक्शा निरस्त करने और निर्माण ध्वस्त कराने की मांग की गयी है। अधिवक्ताओं का कहना है कि कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि गलत सूचना या असत्य हलफनामे के आधार पर नक्शा पास कराया गया हो तो उसे निरस्त कर निर्माण गिराया जा सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन से पूछा जा रहा है कि यदि 1992 में स्वीकृत नक्शे का तथ्य 30 मार्च 2026 के आवेदन में बताया गया होता तो क्या 24 अप्रैल 2026 को यह नक्शा पास होता। मामले में लेखपाल की रिपोर्ट भी संदेह के घेरे में है। 31 मार्च 2026 की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि बिना भौतिक विभाजन के निर्माण किया जा रहा है। लेकिन ठीक तीन सप्ताह बाद 22 अप्रैल 2026 की दूसरी रिपोर्ट में अचानक भौतिक विभाजन की आवश्यकता ही खत्म बता दी गयी। अब गांव में चर्चा यही है कि क्या सच बदला था या फिर रिपोर्ट बदलवाई गयी। फिलहाल सबकी निगाहें नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र पर टिकी हैं कि कानून भारी पड़ेगा या प्रभाव।
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