जौनपुर 10 जून (आरएनएस )। कलक्ट्रेट परिसर में भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन ने बुधवार को केंद्र सरकार के खिलाफ देशव्यापी संघर्ष का ऐलान किया। संगठन ने अपनी मांगों को लेकर भारत के राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी सौंपा है। संगठन के नेता राजनाथ यादव ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2020 में तीन कृषि कानून पारित किए थे, जिनका व्यापक विरोध हुआ था। संयुक्त मोर्चा के ऐतिहासिक आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री को ये कानून वापस लेने पड़े थे। किसानों ने दिसंबर 2020 में सशर्त आंदोलन वापस लिया था। हालांकि, संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने अपने वादों पर अमल नहीं किया, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ रहा है। इसी कारण अब देशव्यापी संघर्ष का निर्णय लिया गया है। संगठन ने राष्ट्रपति से अपनी शक्तियों का उपयोग कर किसानों को न्याय दिलाने का आग्रह किया है। ंगठन की प्रमुख मांगों में एमएसपी कानून को तुरंत लागू करना और खरीद सुनिश्चित करना शामिल है। इसके साथ ही, खाद, बीज और डीजल की पर्याप्त आपूर्ति रियायती दरों पर करने की मांग की गई है। किसानों ने बिजली संशोधन विधेयक 2021 को वापस लेने और स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने की भी अपील की है।अन्य मांगों में किसानों और मजदूरों के सभी कर्ज माफ करना तथा मुफ्त बिजली प्रदान करना शामिल है। संगठन ने चार लेबर-कोड बिलों को वापस लेने और मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये लागू करने की भी मांग की है, ताकि कम वेतन और बढ़ती महंगाई से निपटा जा सके। जेल में बंद मजदूरों पर लगे फर्जी मुकदमे वापस लेकर उन्हें ससम्मान रिहा करने की बात भी कही गई है।
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