—- महिला के बाल पकड़कर घसीटने वाले वीडियो ने खड़े किए असहज सवाल।
—- जंगल पचरुखिया में वायरल वीडियो के बाद पुलिस की कार्यशैली पर बहस तेज, हादसा और मुकदमा छूटा पीछे, अब चर्चा में महिला सम्मान की।
कुशीनगर, 10 जून (आरएनएस)। जनपद के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के जंगल पचरुखिया गांव में ट्रक हादसे के बाद शुरू हुआ विवाद अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है। जहां पूरा मामला पुलिस कार्रवाई से ज्यादा पुलिस के व्यवहार पर केंद्रित हो गया है।सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दो पुलिसकर्मी एक महिला का बाल और हाथ पकड़कर खींचते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो का यही दृश्य अब पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा और सबसे असहज सवाल बन गया है।
ज्ञातव्य हो कि ट्रक हादसा कैसे हुआ, तोडफ़ोड़ किसने की, मुकदमा किस पर दर्ज हुआ, इन तमाम सवालों से बड़ी बहस अब इस बात पर हो रही है कि क्या किसी महिला के साथ इस तरह का व्यवहार करने की इजाजत कानून देता है?। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का वह दृश्य में महिला खुद को छुड़ाने की कोशिश करती दिखाई दे रही है। दूर से लोग विरोध कर रहे हैं और दो पुलिसकर्मी महिला को पकड़कर खींचते नजर आ रहे हैं। वीडियो देखने वाले हर व्यक्ति की नजर इस दृश्य पर जाकर ठहर जाती है। यह सिर्फ एक वीडियो क्लिप नहीं है, बल्कि पुलिस और जनता के रिश्ते पर एक बड़ा सवालिया निशान बन चुका है।ग्रामीणों का कहना है कि महिला कोई अपराधी नहीं थी, न ही वह किसी हिंसक गतिविधि में शामिल थी। ऐसे में उसके साथ इस तरह का व्यवहार क्यों किया गया?, इसका जवाब अब तक किसी के पास नहीं है।
इनसेट– जब कैमरा चालू हुआ, तब सामने आया सच?– अक्सर पुलिस कार्रवाई की कहानी सरकारी कागजों और प्रेस नोट तक सीमित रह जाती है।लेकिन जंगल पचरुखिया में कैमरा चालू था। इसलिए जो हुआ, वह सीधे लोगों की आंखों तक पहुंच गया। वीडियो ने वह दिखा दिया जिसे शायद सामान्य परिस्थितियों में महज एक “कार्रवाई” कहकर फाइलों में बंद कर दिया जाता। यही कारण है कि लोगो मे यह चर्चा है कि यदि कैमरा न होता तो क्या यह घटना भी अनसुनी न रह जाती?।
जानकारो का कहना है कि लोकतंत्र में पुलिस को कानून लागू करने की शक्ति दी गई है, लेकिन वह शक्ति असीमित नहीं है। उसकी भी संवैधानिक और कानूनी सीमाएं हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी महिला को सार्वजनिक रूप से बाल व हाथ पकड़कर खींचना कानून के दायरे में आता है? और यदि नहीं, तो फिर ऐसा करने वालों पर जवाबदेही कब तय होगी? वीडियो में दिख रही तस्वीरें केवल एक महिला का अपमान नहीं, बल्कि उस भरोसे पर भी चोट हैं जो आम लोग पुलिस पर करते हैं।
इनसेट– ग्रामीणों का आरोप: कार्रवाई कम, दबाव ज्यादा– गांव के लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद पुलिस का पूरा फोकस दोषियों की तलाश से ज्यादा ग्रामीणों पर दबाव बनाने पर रहा। घर -घर दबिश, धमकी और कार्रवाई की बातें पहले ही चर्चा में थीं। अब वायरल वीडियो ने उन आरोपों को और हवा दे दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह महिला के साथ व्यवहार किया गया, उसने पूरे गांव को आक्रोशित कर दिया।
इनसेट– खाकी की परीक्षा– पुलिस विभाग के लिए यह मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि अपनी साख बचाने का भी है। क्योंकि सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मी कौन हैं। सवाल यह भी है कि क्या विभाग उस दृश्य को सही मानता है? क्या उस महिला के साथ हुआ व्यवहार पुलिस मैनुअल और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप स्वीकार करता है?। यदि नहीं तो फिर कार्रवाई किस पर होगी? जंगल पचरुखिया का वायरल वीडियो अब जिले की सीमा से निकलकर व्यापक चर्चा का विषय बन चुका है। महिला को बाल पकड़कर क्यों घसीटा गया? क्या मौके पर महिला पुलिसकर्मी मौजूद थी? क्या वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो का संज्ञान लिया है? क्या संबंधित पुलिस कर्मियों की भूमिका की जांच होगी? और सबसे अहम सवाल यह कि क्या महिला की गरिमा के साथ हुए इस कथित व्यवहार पर कोई जवाबदेही तय होगी?वायरल वीडियो फिलहाल इसी सवाल का जवाब मांग रहा है।
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