लखनऊ 12 जून (आरएनएस )। आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा और पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष के बीच सामने आए विवाद को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता वंशराज दुबे ने इसे प्रदेश सरकार की प्रशासनिक विफलता, बढ़ती अफसरशाही और विभागीय अव्यवस्था का प्रमाण बताते हुए कहा कि यदि एक कैबिनेट मंत्री को अपने ही विभाग में कथित अनियमितताओं के खिलाफ पत्र लिखकर गुहार लगानी पड़ रही है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।वंशराज दुबे ने जारी बयान में कहा कि मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष को पत्र लिखकर निगम में जाति और धर्म के आधार पर निर्णय लिए जाने, अनुभवी कर्मचारियों को हटाकर अकुशल लोगों की नियुक्ति किए जाने तथा विभागीय निर्देशों की अनदेखी किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह तथ्य सही हैं तो यह प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।उन्होंने कहा कि इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार के भीतर समन्वय का अभाव है और विभागीय स्तर पर मंत्री की बात को महत्व नहीं दिया जा रहा है। वंशराज दुबे ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मंत्री अपने विभाग का राजनीतिक प्रमुख होता है, लेकिन यदि उसके निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है तो यह शासन व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है।आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि प्रदेश में वास्तविक सत्ता चुने हुए जनप्रतिनिधियों के बजाय कुछ प्रभावशाली अधिकारियों के हाथों में केंद्रित होती जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का तथाकथित “डबल इंजन मॉडल” अब “अफसरशाही मॉडल” में बदल गया है, जहां निर्णय अधिकारी लेते हैं और जवाबदेही मंत्रियों पर डाली जाती है।उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किए जाने वाले सुशासन और रामराज्य के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऊर्जा मंत्री की कथित बेबसी ने इन दावों की वास्तविकता उजागर कर दी है। उन्होंने पूछा कि यदि मंत्री के निर्देशों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है तो सरकार का संचालन आखिर किसके हाथों में है।वंशराज दुबे ने कहा कि सबसे गंभीर पहलू यह है कि ऊर्जा मंत्री को बिजली उपभोक्ताओं पर लगाए गए अतिरिक्त फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज की जानकारी भी कथित रूप से मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से मिली। उन्होंने इसे शासन व्यवस्था में संवादहीनता और प्रशासनिक अव्यवस्था का उदाहरण बताया। उनका कहना था कि यदि विभाग के महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी मंत्री को समय पर नहीं दी जा रही है तो यह सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।उन्होंने कहा कि यदि ऊर्जा मंत्री द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं तो बिजली विभाग में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और मनमानी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप गलत हैं तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि एक जिम्मेदार मंत्री द्वारा ऐसे आरोप सार्वजनिक रूप से क्यों लगाए गए। दोनों ही परिस्थितियों में सरकार की कार्यशैली और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता पहले से ही महंगी बिजली, बार-बार होने वाली कटौती और विद्युत व्यवस्था की विभिन्न समस्याओं से जूझ रही है, जबकि सरकार इन मुद्दों के समाधान के बजाय विभागीय विवादों और आंतरिक खींचतान में उलझी हुई दिखाई दे रही है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।वंशराज दुबे ने मांग की कि ऊर्जा मंत्री द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने पावर कॉर्पोरेशन में हुई भर्तियों, कर्मचारियों की छंटनी तथा वित्तीय निर्णयों की समीक्षा की भी मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रशासनिक निर्णयों के लिए जवाबदेह कौन है और शासन व्यवस्था किस प्रकार संचालित हो रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अंतर्कलह और प्रशासनिक अव्यवस्था से घिरी हुई है तथा इसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। आम आदमी पार्टी ने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सुनिश्चित करने के लिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है
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