दुर्ग, 13 जून (आरएनएस)। साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दुर्ग पुलिस ने म्यूल बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम का अवैध लेन-देन करने वाले 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर आर्थिक लाभ अर्जित करने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल और प्राप्त शिकायतों के आधार पर थाना मोहन नगर क्षेत्र में संचालित कोटक महिंद्रा बैंक के विभिन्न खातों की जांच की गई। जांच में सामने आया कि इन खातों में साइबर ठगी से प्राप्त रकम जमा की जा रही थी और खाताधारक इसके माध्यम से संदिग्ध वित्तीय लेन-देन कर रहे थे।
2024 से 2026 तक के ट्रांजेक्शन खंगालेविवेचना के दौरान वर्ष 2024 से 2026 के बीच हुए बैंकिंग ट्रांजेक्शन और राशि हस्तांतरण की जांच की गई। जांच में पाया गया कि खाताधारकों ने स्वयं या अन्य लोगों के साथ मिलकर अपने बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को इधर-उधर ट्रांसफर करने और अवैध लेन-देन के लिए किया।पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद थाना मोहन नगर में अपराध क्रमांक 329/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 317(2) के अंतर्गत मामला दर्ज कर सभी 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।बैंक खाते उपलब्ध कराना भी अपराधपुलिस जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी अपने बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगों द्वारा भेजी गई रकम के लेन-देन के लिए कर रहे थे। ऐसे खातों को आमतौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी की रकम को छिपाने और ट्रैकिंग से बचने के लिए करते हैं।दस्तावेज और बैंकिंग रिकॉर्ड जब्तपुलिस ने आरोपियों से बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड तथा जांच में उपयोगी इलेक्ट्रॉनिक एवं बैंकिंग अभिलेख जब्त किए हैं। मामले में साइबर सेल और थाना मोहन नगर की टीम द्वारा तकनीकी विश्लेषण एवं बैंकिंग दस्तावेजों की जांच के आधार पर कार्रवाई की गई।दुर्ग पुलिस की अपीलदुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, मोबाइल नंबर या इंटरनेट बैंकिंग सुविधा उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि साइबर अपराध में बैंक खाते के इस्तेमाल की स्थिति में खाताधारक के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। किसी भी साइबर ठगी की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में देने की अपील की गई है।
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