—-मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल समेत सभी चिकित्सालयों के डॉक्टर ले रहे एनपीए।
—- विभागीय आला अधिकारियों के संरक्षण मे सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सक करते है प्राइवेट प्रैक्टिस, स्वास्थ्य विभाग नहीं चलाया चेकिंग अभियान।
कुशीनगर 14 जून (आरएनएस)। शासन-प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए जिले के कई सरकारी चिकित्सक धड़ल्ले से प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। एक तरफ सरकार से नॉन प्रैक्टिस अलाउंस, एनपीए का लाभ ले रहे हैं तो दूसरी तरफ मरीजों की जेब पर डाका भी डाल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो यहां के बड़े से बड़े सरकारी अस्पताल हों या फिर गांव देहात के स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात डॉक्टर। कोई भी इससे अछूता नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी करनी ही बंद कर दी है। कई वर्षों में किसी तरह का कोई अभियान नहीं चलाया गया है। जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद सरकारी डॉक्टरों द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस किए जाने पर सख्त रुख अपनाते रहे है। उन्होंने स्पष्ट रूप से सरकारी सेवाओं में रहते हुए निजी प्रैक्टिस या नर्सिंग होम में सेवाएं देने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई किए जाने का निर्देश दे रखा है लेकिन जिम्मेदारों ने सीएम के आदेशों को भी दर किनार कर दिया।
जनपद में जिला अस्पताल सम्बद्ध मेडिकल कालेज,
जिला महिला चिकित्सालय सहित समस्त सीएचसी, पीएचसी है। जहां बड़ी संख्या में चिकित्सकों की तैनाती हैं। इनमें अमूमन सभी चिकित्सक एनपीए ले रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में तो शत प्रतिशत चिकित्सकों के एनपीए लेने की बात सामने आई है। गाहे-बगाहे शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। जिसका ताजा उदाहरण जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कालेज, जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सक डा0 दीन मुहम्मद द्वारा सरकारी आवास में प्राइवेट प्रैक्टिस करने का प्रकरण सामने आया है। उक्त चिकित्सक जिला मुख्यालय जैसे स्थान पर जहां जनपद के सभी आला अधिकारी रहते है फिर भी सरकारी आवास में प्राइवेट प्रैक्टिस करते पकड़े जाना साथ ही उनके आवास से भारी मात्रा में सरकारी दवाएं भी बरामद होना। व्यवस्था मे खोट दर्शाने के लिए काफी है। हालांकि जिम्मेदारों ने चुप्पी साध रखी है। एक बार व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर चेकिंग करने की जरूरत है। सूत्रों की मानें तो जिले के सरकारी अस्पतालों के निकट चल रही मेडिकल दुकानों के संचालक चिकित्सकों के प्राइवेट प्रैक्टिस के सूत्रधार माने जाते हैं। सारी सेटिंग यही कराते हैं। कई अस्पतालों के चिकित्सक इन्हीं के यहां जाकर प्रैक्टिस करते हैं। ओपीडी टाइम में मेडिकल स्टोर से पर्चा उनके मोबाइल पर पहुंच जाता है। इसके बाद चिकित्सक मरीज को देखकर दोबारा अस्पताल की ओपीडी में पहुंच जाता है। कुछ सरकारी डॉक्टर तो
बड़े-बड़े नर्सिंग होम में जाकर भी अपनी सेवाएं देते हैं। इतना ही नहीं कुछ तो बकायदे अपने निजी आवासो में धड़ल्ले से प्राइवेट प्रैक्टिस करते है। इनका वीडियो भी समय- समय पर वायरल होता रहता है फिर भी ऐसे मामले में अभी तक किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वही नॉन-प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सरकारी डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों को दिया जाने वाला एक विशेष मासिक भत्ता है, जो निजी प्रैक्टिस न करने के बदले में मिलता है। यह मुख्य रूप से उन डॉक्टरों को दिया जाता है। जिनकी डिग्री क्लिनिकल है और जो पूर्णकालिक सरकारी सेवा में हैं। उन्हें बेसिक और डीए का 10 फीसदी अतिरिक्त एनपीए के रूप में दिया जाता है। इस संबंध में सीएमओ कुशीनगर के सरकारी मोबाइल नंबर पर बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका मोबाइल नही उठा।
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