ग्वालियर 29 June (rns) । कबूतर रेसिंग का ग्वालियर नया ठिकाना बन रहा है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई की कई पिजन सोसायटी हर साल मई से जून माह के बीच कबूतर रेसिंग प्रतियोगिता का आयोजन करती हैं। नियम के तहत तमिलनाडु के अलग-अलग हिस्सों से कबूतरों को ग्वालियर लाकर छोड़ा जाता है और जो कबूतर सबसे पहले अपने मालिक के पास 1500 किमी दूर चेन्नई पहुंचता है, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है।
गत छह मई को भी चेन्नई की रॉयल पिजन सोसायटी द्वारा ग्वालियर लाकर कबूतरों को छोड़ा गया था और विजेता एम. वेंकटेशन का कबूतर ग्वालियर से उड़ान भरने के बाद मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक होते हुए तमिलनाडु के वेल्लोर जिले स्थित पल्लिकोंडा गांव में अपने घर सबसे पहले पहुंचा।
उसने करीब 99 घंटे (आठ दिन) में 1460 किमी की हवाई दूरी तय की। इस कबूतर ने नेशनल लेवल की लांग-डिस्टेंस रेस अपने नाम कर ली। अब आगामी कुछ महीनों के दौरान एक बार फिर ग्वालियर से कबूतर रेसिंग की प्रतियोगिता शुरू होंगी। दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु और कर्नाटक) की कबूतर सोसायटियों के लिए ग्वालियर और नई दिल्ली को आदर्श रिलीज प्वाइंट (कबूतरों को छोड़ने की जगह) माना जाता है। यहां से दक्षिण भारत की दूरी 1500 से 1800 किलोमीटर से अधिक बैठती है, जो इन पक्षियों की सहनशक्ति, दिशा ज्ञान और गति की वास्तविक परीक्षा लेती है

