New Delhi 30 June (Rns) /- बीजेपी सरकार उत्तराखंड, गुजरात, असम के बाद अब पश्चिम बंगाल में यूसीसी लाने की तैयारी में है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि यूसीसी का मसौदा 2 जुलाई को कैबिनेट के सामने लाया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अगस्त महीने में विधानसभा सत्र में समान नागरिक संहिता बिल पेश होगा। उन्होंने कहा कि कानून का मसौदा तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है।
दरअसल, बीजेपी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में अपने ‘संकल्प पत्र’ में सरकार बनने के छह महीने के भीतर यूसीसी लागू करने का वादा किया था। अब सरकार उस वादे को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने यूसीसी का प्रारूप तैयार कर लिया है। इसे पहले कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसके बाद इसे विधानसभा में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा।
शुभेंदु ने कहा कि सरकार ने इस कानून को तैयार करने में उन राज्यों के मॉडल का अध्ययन किया है, जहां पहले ही यूसीसी लागू किया जा चुका है।
शुभेंदु सरकार के इस फ़ैसले पर टीएमसी ने कहा है कि यदि इसमें कुछ भी असंवैधानिक होगा तो वह विरोध करेगी। बंगाल विधानसभा में पेश होने वाले यूसीसी बिल पर टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने कहा, ‘हम संविधान में पक्का यकीन रखते हैं। अगर कोई कानून असंवैधानिक है तो हम निश्चित रूप से उसका विरोध करेंगे। हमें यूसीसी के पीछे बीजेपी के इरादों को लेकर चिंता है। बीजेपी इन कानूनों का इस्तेमाल समुदायों के बीच नफरत फैलाने और ध्रुवीकरण करने के लिए करती है।’
इससे पहले मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल सरकार गुजरात, उत्तराखंड और असम की प्रक्रिया का अनुसरण करेगी।
2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि सत्ता में आने के छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह ने भी कहा था कि पश्चिम बंगाल में सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू किया जाएगा।

