नईदिल्ली ,01 जुलाई(आरएनएस)। सरकार संसद के मानसून सत्र के दौरान 130वें संविधान संशोधन विधेयक को पेश कर सकती है। फिलहाल ये विधेयक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास है, जो इसे सत्र शुरू होने से पहले मंजूरी दे सकती है। इस विधेयक में गंभीर अपराधों के लिए लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार और हिरासत में रखे जाने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों या अन्य मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान है। बताया जा रहा है कि जेपीसी ने इस प्रावधान को बरकरार रखा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जेपीसी ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाए जाने के प्रावधान को बरकरार रखा है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस विधेयक पर विचार और पारित कराने के लिए संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा, जिसके 20 जुलाई से शुरू होने की संभावना है। इस विधेयक को गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले साल अगस्त में पेश किया था।
सूत्रों के मुताबिक, सत्ताधारी गठबंधन के सांसद, विपक्ष और यहां तक कि तटस्थ सदस्य भी इस बात पर सहमत थे कि विधेयक में कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रावधान जोड़े जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सुझाव सिफारिशों का हिस्सा होगा। समिति से यह सिफारिश करने की भी उम्मीद है कि कानून का दायरा बहुत व्यापक रखने के बजाय, प्रस्तावित कानून के प्रावधानों को लागू करने के लिए अपराध की प्रकृति पर कुछ प्रतिबंध होने चाहिए।
विपक्ष का कहना है कि विधेयक के प्रावधान अलोकतांत्रिक और संघीय ढांचे के खिलाफ हैं। विपक्ष का तर्क था कि ये प्रावधान प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांत के भी खिलाफ हैं, क्योंकि इसमें दोषी ठहराए जाने के बजाय सिर्फ हिरासत के आधार पर सजा दी जा रही है। वहीं, सरकार का तर्क है कि 30 दिन का समय कम से कम 3 बार जमानत अर्जी लगाने के लिए काफी है, इसलिए यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं है।
जेपीसी में 31 सदस्य हैं, जिसकी अध्यक्षता अपराजिता सारंगी कर रही हैं। कांग्रेस सहित विपक्ष के इंडिया गठबंधन के ज्यादातर सदस्यों ने जेपीसी का बहिष्कार किया था। हालांकि, इसमें अभी भी एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी और एनसीपी (एसपी)की सुप्रिया सुले हैं। रिपोर्ट में दावा है कि विपक्षी सांसद रिपोर्ट पर असहमति नोट दे सकते हैं। वाईएसआरसीपी के निरंजन रेड्डी सिरगापुर (राज्यसभा सांसद) भी इस समिति का हिस्सा हैं।
इस विधेयक में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को स्वत: पद से हटाने का प्रावधान है, अगर उन्हें 5 साल या ज्यादा के कारावास वाले अपराधों में गिरफ्तार किया जाता है और 30 दिनों तक जेल में रखा जाता है। गिरफ्तारी के 31वें दिन तक इस्तीफा नहीं देने पर खुद पद से हट जाएंगे। अगर 30 दिन तक जमानत नहीं मिली तो तुरंत पद छोडऩा होगा। इसका उद्देश्य राजनीति से अपराध और अपराधियों को खत्म करना और भ्रष्टाचार को हटाना है।
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