नई दिल्ली ,01 जुलाई(आरएनएस)। बदलते युद्ध स्वरूप और आधुनिक सैन्य चुनौतियों को देखते हुए भारतीय सेना अपनी युद्ध क्षमता को नई दिशा देने जा रही है। सेना अब विशेष बाज बटालियन का गठन करने की तैयारी में है, जो पूरी तरह ड्रोन आधारित सैन्य अभियानों के लिए समर्पित इकाइयाँ होंगी। इनका उद्देश्य सीमाओं पर चौबीसों घंटे निगरानी, सटीक हमले, खुफिया जानकारी जुटाना तथा विभिन्न सैन्य अभियानों में प्रभावी सहयोग प्रदान करना है।
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के अनुसार, बाज बटालियनों का विकास मौजूदा दूर से संचालित विमान इकाइयों के आधार पर किया जाएगा। वर्तमान ड्रोन टुकडिय़ों के विपरीत ये स्वतंत्र और विशेष संरचना वाली इकाइयाँ होंगी, जिनका पूरा ध्यान मानवरहित हवाई अभियानों पर केंद्रित रहेगा।
सीमाओं की निगरानी से लेकर सटीक हमलों तक निभाएंगी अहम भूमिका
बाज बटालियन का प्रमुख कार्य संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी को और अधिक सशक्त बनाना होगा। इसके साथ ही ये इकाइयाँ निरंतर खुफिया जानकारी जुटाने, लंबी दूरी तक हवाई निगरानी करने, ड्रोन के माध्यम से सटीक हमले करने तथा तोपखाना और मिसाइल इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित करने का कार्य करेंगी।
सेना के अधिकारियों के अनुसार, इन बटालियनों की जिम्मेदारियों में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली तथा ड्रोन-रोधी प्रणालियों के साथ समन्वय, युद्ध अभियानों के दौरान पैदल सेना को सहायता उपलब्ध कराना और विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना भी शामिल होगा।
एक ही मंच से होगा ड्रोन संचालन
आधुनिक युद्ध में केवल एक प्रकार के ड्रोन का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि निगरानी, रसद आपूर्ति और हमले के लिए अलग-अलग प्रकार के ड्रोन एक साथ संचालित किए जाते हैं। ऐसे में दर्जनों ड्रोन से प्राप्त सूचनाओं का तत्काल विश्लेषण और नियंत्रण बड़ी चुनौती बन जाता है।
बाज बटालियन इस पूरी व्यवस्था के लिए केंद्रीय नियंत्रण केंद्र के रूप में कार्य करेगी। इससे ड्रोन संचालन अधिक प्रभावी, समन्वित और त्वरित होगा।
ड्रोन संचालन का मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
ड्रोन संचालन आधुनिक युद्ध की अत्यंत तकनीकी और विशेषज्ञता वाली विधा है। बाज बटालियन विभिन्न सैन्य इकाइयों के लिए ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण मानकीकृत करेगी, जिससे सैनिकों को एक समान और उच्च स्तर का प्रशिक्षण मिल सकेगा। इससे भविष्य के युद्धों के लिए सेना की तैयारी और अधिक मजबूत होगी।
आधुनिक युद्धों से मिली सीख
सेना ने रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन के साथ सीमा तनाव तथा पाकिस्तान के विरुद्ध संचालित ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों से मिले अनुभवों के आधार पर यह पहल शुरू की है। इन संघर्षों में ड्रोन की भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही है। इसके अलावा ईरान द्वारा अमेरिका और इजऱाइल के साथ संघर्ष के दौरान बड़े पैमाने पर ड्रोन के उपयोग ने भी आधुनिक युद्ध में इस तकनीक की बढ़ती अहमियत को स्पष्ट किया है।
सेना का मानना है कि अब ड्रोन केवल सहायक उपकरण नहीं रह गए हैं, बल्कि वे युद्ध की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए इनके लिए अलग संगठन, प्रशिक्षित कर्मी, विशेष उपकरण और स्वतंत्र कमान व्यवस्था आवश्यक है।
दो वर्षों में कई गुना बढ़ी क्षमता
भारतीय सेना की ड्रोन क्षमता में पिछले दो वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले सेना के पास सीमित संख्या में ड्रोन प्रणालियाँ थीं, जबकि जून 2026 तक यह संख्या बढ़कर 50 हजार से अधिक हो चुकी है।
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि बाज बटालियन भारतीय सेना की दूर से संचालित विमान प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इन इकाइयों के गठन से भविष्य के युद्धों में भारतीय सेना की निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक कार्रवाई करने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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